बैंकिंग उद्योग – Mrpinindia

बैंकिंग उद्योग

प्रत्येक नियामक एजेंसी के पास अपने नियमो और विनियमों का सेट है जिसे बैंक और thrifts पालन अवश्य करना चाहिए जो करना है

फेडरल वित्तीय संस्थाओं परीक्षा परिषद (FFIEC) 1979 में एक औपचारिक अंतरकालीन निकाय है जो वर्णित सामान सिद्धांतों, मानक और वित्तीय संस्थानों के संघीय परीक्षा के लिए रिपोर्ट रूपों से सशकत के लिए स्थापित किया गया हालाकि ऍफ़ ऍफ़ आई ई सी एजेंसियों के बीच एक व्यापक मात्रा की विनियामक निरंतरता के रूप में परिणत हुआ है, नियम और विनियम लगातार बदल रहे हैं

नियमों को बदलने के अलावा, इस उद्योग में परिवर्तन के स्थिरीकरण के लिए परिवर्तन ने फेडरल रिजर्व, FDIC, ओ टी एस और OCC के भीतर का नेतृत्व किया हैकार्यालय बंद हो गए हैं, पर्यवेक्षी क्षेत्रों में विलय है, कर्मचारी स्तर कम हो गया है और बजट में कटौती की गई है शेष नियामक एक बढे हुए बोझ और अधिक प्रति नियामक के साथ बढ़ा है जब बैंक विनियामक वातावरण में बदलाव के साथ संघर्ष करते हैं, नियामक अपने कार्य भार को प्रभावी रूप से अपने बैंकों को विनियमित करने के लिए संघर्ष करते हैं इन परिवर्तनों का प्रभाव यह है की बैंक नियामकों से मूल्यांकित कम हाथों को प्राप्त कर रही हैं, प्रत्येक संस्थान के साथ कम व्यतीत समय और अधिक समस्याओं की दरारों के माध्यम से फिसल के लिए, संभावित संयुक्त बैंक असफलता पुरे यु के में

बदलता आर्थिक परिवेश का बैंकों और कम खर्च पर एक महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है क्योंकि वे अपने ब्याज डर के विस्तार को ऋण पर कम डर पर सामना करने के लिए प्रभावी प्रबंधित करते हैं, जमा राशियों के लिए प्रतियोगिता की दर और आम बाजार में परिवर्तन और आर्थिक लचीलेपन के लिए उद्योग प्रवृत्तियोंयह बैंकों के लिए प्रभावी रूप से हाल ही में बाजार के साथ अपने आर्थिक विकास की रणनीति तय करने के लिए एक चुनौती रहा है। एक बढ़ती ब्याज दर परिवेश को वित्तीय संस्थाओं में मदद करने के लिए, लग सकता है लेकिन परिवर्तन के प्रभाव उपभोक्ताओं और व्यापारों पर पूर्वानुमान नहीं है और बैंकों के लिए चुनौती और विकसित करने के लिए प्रभावी रूप से प्रबंधित प्रसार को अपने शेयरधारकों के लिए एक वापसी उत्पन्न करने के लिए बनी हुई है।

बैंक के ‘परिसंपत्ति विभागों का प्रबंधन भी आज के आर्थिक परिवेश में एक चुनौती बनी हुई है। ऋण एक बैंक की प्राथमिक परिसंपत्ति वर्ग है और जब ऋण की गुणवत्ता पर शक हो जाता हैं, एक बैंक की नींव को कोर के लिए हिल रहा है। जबकि बैंकों के लिए हमेशा एक मुद्दा, गिरावट परिसंपत्ति गुणवत्ता वित्तीय संस्थाओं के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। इसके लिए कई कारन है, जिसमे से एक ढीला रवैया है कुछ बैंक अच्छा समय की वजह से अपनाया है इसके लिए क्षमता बैंक के नियामक निरीक्षण में कमी और प्रबंधन के कुछ मामलों में गहराई से दृष्टि शामिल है समस्याओं को बिना खोजे जाने की संभावना है, जब मान्यता के बाद बैंक पर एक महत्वपूर्ण प्रभाव के लिए इसके अलावा, बैंक, किसी अन्य व्यापार की तरह, लागत कम करने के लिए संघर्ष करते हैं और परिणामतः कुछ खर्चों कोसमाप्त किया है जैसे पर्याप्त कर्मचारी प्रशिक्षण कार्यक्रम
बैंक को बुढ़ापे स्वामित्व समूहों जैसे अन्य चुनौतियों में से कुछ का सामना करना पड़ता हैदेश भर में, कई बैंकों के प्रबंधन दल और निर्देशकों के बोर्ड पुराने हो रहे हैं। बैंक शेयरधारकों द्वारा चल रहे दबाव का सामना करते हैं, सार्वजनिक और निजी दोनों आय और विकास अनुमानों को प्राप्त करने के लिएनियामक बैंक पर विभिन्न जोखिम के वर्गीकरण पर दबाव बढ़ते हैं बैंकिंग भी एक अत्यंत प्रतिस्पर्धी उद्योग है। वित्तीय सेवा उद्योग में प्रतिस्पर्धा बीमा एजेंसियों, क्रेडिट यूनियनों के रूप में ऐसे खिलाड़ियों के प्रवेश द्वार के साथ, सख्त हो गया है

एक प्रतिक्रिया के रूप में, बैंक अपनी क्रियाओं को वित्तीय साधनों (financial instruments) द्वारा,वित्तीय बाजार (financial market) दलाली (brokerage) और व्यापार (trading) जैसे संचालन इस क्रिया में बड़े खिलाडी हैं.

1.एक बैंक ब्याज के स्तर के बीच के अंतर में से एक लाभ.

उत्पन्न करता है जो यह कोष के जमा और अन्य स्रोतों के लिए अदा करता है और ब्याज का स्तर इसके क्रिया के लिए शुल्क लेता है इस अंतर करने के फैलाव निधियों की लागत और ऋण की ब्याज दर के बीच.के लिए कहा जाता हैऐतिहासिक रूप से उधार देने की गतिविधियों से लाभप्रदता चक्रीय हो गया है और है और ऋण ग्राहकों की ताकत ज़रूरत पर निर्भर है हाल के इतिहास में, निवेशकों ने एक अधिक स्थिर राजस्व धरा की मांग की है और बैंक इसलिए ने लेनदेन फीस पर अधिक जोर दिया है, प्राथमिक ऋण शुल्क पर सेवा प्रभार मुख्य रूप से ऋण फीस (अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, विदेशी मुद्रा, बीमा, निवेश, तार स्थानान्तरण, आदि).उधार देने की गतिविधिया, फ़िर भी, अभी तक एक वाणिज्यिक बैंक को थोक आय प्रदान करते हैं

पिचले १० सालोंमे अमेरिकी बैंक मुनाफे में रहने को सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए हैं जबकि तेजी से बाजार की स्थितियों में बदलाव का जवाब हैपहला, यह भी शामिल है Gramm-Leach-Bliley अधिनियम (Gramm-Leach-Bliley Act) है, जो बैंकों को फिर से निवेश और बीमा घरों के साथ विलय करने की अनुमति देता है। बैंकिंग, निवेश और बीमा कार्य पारंपरिक बैंक को ग्राहकों की बढती “one-stop shopping”पार बिक्री उत्पाद (जिसकी बैंक आशा करते हैं, लाभ बढ़ाएगा) दूसरा, उन्होंने जोखिम आधारित मूल्य निर्धारण (risk-based pricing) के प्रयोग का विस्तार किया है, व्यापार ऋण से उपभोक्ता ऋण, जिसका मतलब उनके उच् ब्याज डर का प्रभार उन ग्राहकों के लिए जिन्हें उच्च जोखिम ऋण मन जाता है और इस प्रकार ऋण की असफलता (default) का मौका बढ़ जाती है यह कर्ज को बरबाद होने से बचाती है, बेहतर ऋण के इतिहास वालों के कर्ज को कम करती है और उचे जोखिम वाले ग्राहकों को ऋण उत्पाद का प्रस्ताव देती है जिन्हें किसी प्रकार ऋण से इनकार कर दिया है तीसरा, उन्होंने अदायगी की विधियों को बढ़ा दिया है जो सामान्य जनता और व्यापारिक पक्षों को उपलब्ध है इन उत्पादों डेबिट कार्ड, पूर्व का भुगतान किया कार्ड, स्मार्ट कार्ड और क्रेडिट कार्ड शामिल हैं। ये उत्पाद उपभोक्ताओं के लिए सुविधा से लेनदेन करने के लिए और समय के अंतर्गत-वित्तीय प्रणाली विकसित करने को आसन बनते हैं (कुछ देशों में विकाश शील वित्तीय प्रणाली के अंतर्गत, यह अभी भी नकद में सख्ती से पेश आना सामान्य है, घर खरीदने के लिए अत्तैची में नकद रखना) हालांकि, सुविधा के साथ वहाँ भी खतरा बढ़ रहा है की उपभोक्ता अपने वित्तीय संसाधनों का कुप्रबंधन करेंगे और अत्यधिक ऋण जमा वृद्धि करेंगे बैंक ब्याज भुगतान और उपभोक्ताओं को प्रभारित शुल्क ओर कंपनियों के लेनदेन के द्वारा कार्ड उत्पादों से पैसा बनाते हैं

वैश्विक वित्तीय दिग्गज कंपनी जेपी मॉर्गन चेस एक SPV अचल संपत्ति फर्म आलोक बुनियादी सुविधा, आधारित वस्त्र निर्माता और रिटेलर आलोक उद्योग की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक, ३३% हिस्से के लिए १३० करोर रुपयों का निवेश कर रही है आलोक बुनियादी सुविधा SPV, जो कि जेपी मॉर्गन का कोष प्राप्त कर रहा है, मुंबई के प्रमुख स्थान पर एक अचल संपत्ति परियोजना का विकास करेगा अलोक इन्फ्रा मुंबई के कई स्थानों पर भूमि रखती है, जिसमे से कुछ इसने पिछले एक साल में हाई प्रोफाइल लेन देन में खरीदा था आलोक बुनियादी सुविधा कुछ निजी इक्विटी खिलाड़ियों के साथ ऑफ़ लोड इक्विटी के लिए बातचीत कर रहा था एक गिरते शेयर बाजार और सुस्त अचल संपत्ति का बाज़ार देर से, फ़िर भी अचल संपत्ति फर्म आलोक इन्फ़रा और कई अन्य कंपनियों को जबरदस्ती के मूल्यांकन को नीचे लाया है

बैंकिंग उद्योग की बढ़ती लाभ के लिए मुख्य बाधा बढती नियामक बोझ, सरकारी नए नियामक और गैर पारंपरिक वित्तीय संस्थानों की बढती प्रतियोगिता है.

2. बैंक क्या है और इसके क्या क्या कार्य है?


Bank एक ऐसी वित्तीय संस्था को कहा जाता है जो लोगों के पैसों जमा करती है और लोगों को क़र्ज़ देती है. बैंक हर प्रकार के क्षेत्र में इन्वेस्ट करती है चाहे वो लोगों को क़र्ज़ देना हो या फिर किसी प्रकार के बिज़नेस के लिए क़र्ज़ देना हो.

प्रत्येक नियामक एजेंसी के पास अपने नियमो और विनियमों का सेट है जिसे बैंक और thrifts पालन अवश्य करना चाहिए जो करना है

फेडरल वित्तीय संस्थाओं परीक्षा परिषद (FFIEC) 1979 में एक औपचारिक अंतरकालीन निकाय है जो वर्णित सामान सिद्धांतों, मानक और वित्तीय संस्थानों के संघीय परीक्षा के लिए रिपोर्ट रूपों से सशकत के लिए स्थापित किया गया हालाकि ऍफ़ ऍफ़ आई ई सी एजेंसियों के बीच एक व्यापक मात्रा की विनियामक निरंतरता के रूप में परिणत हुआ है, नियम और विनियम लगातार बदल रहे हैं

नियमों को बदलने के अलावा, इस उद्योग में परिवर्तन के स्थिरीकरण के लिए परिवर्तन ने फेडरल रिजर्व, FDIC, ओ टी एस और OCC के भीतर का नेतृत्व किया हैकार्यालय बंद हो गए हैं, पर्यवेक्षी क्षेत्रों में विलय है, कर्मचारी स्तर कम हो गया है और बजट में कटौती की गई है शेष नियामक एक बढे हुए बोझ और अधिक प्रति नियामक के साथ बढ़ा है जब बैंक विनियामक वातावरण में बदलाव के साथ संघर्ष करते हैं, नियामक अपने कार्य भार को प्रभावी रूप से अपने बैंकों को विनियमित करने के लिए संघर्ष करते हैं इन परिवर्तनों का प्रभाव यह है की बैंक नियामकों से मूल्यांकित कम हाथों को प्राप्त कर रही हैं, प्रत्येक संस्थान के साथ कम व्यतीत समय और अधिक समस्याओं की दरारों के माध्यम से फिसल के लिए, संभावित संयुक्त बैंक असफलता पुरे यु के में

बदलता आर्थिक परिवेश का बैंकों और कम खर्च पर एक महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है क्योंकि वे अपने ब्याज डर के विस्तार को ऋण पर कम डर पर सामना करने के लिए प्रभावी प्रबंधित करते हैं, जमा राशियों के लिए प्रतियोगिता की दर और आम बाजार में परिवर्तन और आर्थिक लचीलेपन के लिए उद्योग प्रवृत्तियोंयह बैंकों के लिए प्रभावी रूप से हाल ही में बाजार के साथ अपने आर्थिक विकास की रणनीति तय करने के लिए एक चुनौती रहा है। एक बढ़ती ब्याज दर परिवेश को वित्तीय संस्थाओं में मदद करने के लिए, लग सकता है लेकिन परिवर्तन के प्रभाव उपभोक्ताओं और व्यापारों पर पूर्वानुमान नहीं है और बैंकों के लिए चुनौती और विकसित करने के लिए प्रभावी रूप से प्रबंधित प्रसार को अपने शेयरधारकों के लिए एक वापसी उत्पन्न करने के लिए बनी हुई है।

बैंक के ‘परिसंपत्ति विभागों का प्रबंधन भी आज के आर्थिक परिवेश में एक चुनौती बनी हुई है। ऋण एक बैंक की प्राथमिक परिसंपत्ति वर्ग है और जब ऋण की गुणवत्ता पर शक हो जाता हैं, एक बैंक की नींव को कोर के लिए हिल रहा है। जबकि बैंकों के लिए हमेशा एक मुद्दा, गिरावट परिसंपत्ति गुणवत्ता वित्तीय संस्थाओं के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। इसके लिए कई कारन है, जिसमे से एक ढीला रवैया है कुछ बैंक अच्छा समय की वजह से अपनाया है इसके लिए क्षमता बैंक के नियामक निरीक्षण में कमी और प्रबंधन के कुछ मामलों में गहराई से दृष्टि शामिल है समस्याओं को बिना खोजे जाने की संभावना है, जब मान्यता के बाद बैंक पर एक महत्वपूर्ण प्रभाव के लिए इसके अलावा, बैंक, किसी अन्य व्यापार की तरह, लागत कम करने के लिए संघर्ष करते हैं और परिणामतः कुछ खर्चों कोसमाप्त किया है जैसे पर्याप्त कर्मचारी प्रशिक्षण कार्यक्रम
बैंक को बुढ़ापे स्वामित्व समूहों जैसे अन्य चुनौतियों में से कुछ का सामना करना पड़ता हैदेश भर में, कई बैंकों के प्रबंधन दल और निर्देशकों के बोर्ड पुराने हो रहे हैं। बैंक शेयरधारकों द्वारा चल रहे दबाव का सामना करते हैं, सार्वजनिक और निजी दोनों आय और विकास अनुमानों को प्राप्त करने के लिएनियामक बैंक पर विभिन्न जोखिम के वर्गीकरण पर दबाव बढ़ते हैं बैंकिंग भी एक अत्यंत प्रतिस्पर्धी उद्योग है। वित्तीय सेवा उद्योग में प्रतिस्पर्धा बीमा एजेंसियों, क्रेडिट यूनियनों के रूप में ऐसे खिलाड़ियों के प्रवेश द्वार के साथ, सख्त हो गया है

एक प्रतिक्रिया के रूप में, बैंक अपनी क्रियाओं को वित्तीय साधनों (financial instruments) द्वारा,वित्तीय बाजार (financial market) दलाली (brokerage) और व्यापार (trading) जैसे संचालन इस क्रिया में बड़े खिलाडी हैं.

1.एक बैंक ब्याज के स्तर के बीच के अंतर में से एक लाभ.

उत्पन्न करता है जो यह कोष के जमा और अन्य स्रोतों के लिए अदा करता है और ब्याज का स्तर इसके क्रिया के लिए शुल्क लेता है इस अंतर करने के फैलाव निधियों की लागत और ऋण की ब्याज दर के बीच.के लिए कहा जाता हैऐतिहासिक रूप से उधार देने की गतिविधियों से लाभप्रदता चक्रीय हो गया है और है और ऋण ग्राहकों की ताकत ज़रूरत पर निर्भर है हाल के इतिहास में, निवेशकों ने एक अधिक स्थिर राजस्व धरा की मांग की है और बैंक इसलिए ने लेनदेन फीस पर अधिक जोर दिया है, प्राथमिक ऋण शुल्क पर सेवा प्रभार मुख्य रूप से ऋण फीस (अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, विदेशी मुद्रा, बीमा, निवेश, तार स्थानान्तरण, आदि).उधार देने की गतिविधिया, फ़िर भी, अभी तक एक वाणिज्यिक बैंक को थोक आय प्रदान करते हैं

पिचले १० सालोंमे अमेरिकी बैंक मुनाफे में रहने को सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए हैं जबकि तेजी से बाजार की स्थितियों में बदलाव का जवाब हैपहला, यह भी शामिल है Gramm-Leach-Bliley अधिनियम (Gramm-Leach-Bliley Act) है, जो बैंकों को फिर से निवेश और बीमा घरों के साथ विलय करने की अनुमति देता है। बैंकिंग, निवेश और बीमा कार्य पारंपरिक बैंक को ग्राहकों की बढती “one-stop shopping”पार बिक्री उत्पाद (जिसकी बैंक आशा करते हैं, लाभ बढ़ाएगा) दूसरा, उन्होंने जोखिम आधारित मूल्य निर्धारण (risk-based pricing) के प्रयोग का विस्तार किया है, व्यापार ऋण से उपभोक्ता ऋण, जिसका मतलब उनके उच् ब्याज डर का प्रभार उन ग्राहकों के लिए जिन्हें उच्च जोखिम ऋण मन जाता है और इस प्रकार ऋण की असफलता (default) का मौका बढ़ जाती है यह कर्ज को बरबाद होने से बचाती है, बेहतर ऋण के इतिहास वालों के कर्ज को कम करती है और उचे जोखिम वाले ग्राहकों को ऋण उत्पाद का प्रस्ताव देती है जिन्हें किसी प्रकार ऋण से इनकार कर दिया है तीसरा, उन्होंने अदायगी की विधियों को बढ़ा दिया है जो सामान्य जनता और व्यापारिक पक्षों को उपलब्ध है इन उत्पादों डेबिट कार्ड, पूर्व का भुगतान किया कार्ड, स्मार्ट कार्ड और क्रेडिट कार्ड शामिल हैं। ये उत्पाद उपभोक्ताओं के लिए सुविधा से लेनदेन करने के लिए और समय के अंतर्गत-वित्तीय प्रणाली विकसित करने को आसन बनते हैं (कुछ देशों में विकाश शील वित्तीय प्रणाली के अंतर्गत, यह अभी भी नकद में सख्ती से पेश आना सामान्य है, घर खरीदने के लिए अत्तैची में नकद रखना) हालांकि, सुविधा के साथ वहाँ भी खतरा बढ़ रहा है की उपभोक्ता अपने वित्तीय संसाधनों का कुप्रबंधन करेंगे और अत्यधिक ऋण जमा वृद्धि करेंगे बैंक ब्याज भुगतान और उपभोक्ताओं को प्रभारित शुल्क ओर कंपनियों के लेनदेन के द्वारा कार्ड उत्पादों से पैसा बनाते हैं

वैश्विक वित्तीय दिग्गज कंपनी जेपी मॉर्गन चेस एक SPV अचल संपत्ति फर्म आलोक बुनियादी सुविधा, आधारित वस्त्र निर्माता और रिटेलर आलोक उद्योग की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक, ३३% हिस्से के लिए १३० करोर रुपयों का निवेश कर रही है आलोक बुनियादी सुविधा SPV, जो कि जेपी मॉर्गन का कोष प्राप्त कर रहा है, मुंबई के प्रमुख स्थान पर एक अचल संपत्ति परियोजना का विकास करेगा अलोक इन्फ्रा मुंबई के कई स्थानों पर भूमि रखती है, जिसमे से कुछ इसने पिछले एक साल में हाई प्रोफाइल लेन देन में खरीदा था आलोक बुनियादी सुविधा कुछ निजी इक्विटी खिलाड़ियों के साथ ऑफ़ लोड इक्विटी के लिए बातचीत कर रहा था एक गिरते शेयर बाजार और सुस्त अचल संपत्ति का बाज़ार देर से, फ़िर भी अचल संपत्ति फर्म आलोक इन्फ़रा और कई अन्य कंपनियों को जबरदस्ती के मूल्यांकन को नीचे लाया है

बैंकिंग उद्योग की बढ़ती लाभ के लिए मुख्य बाधा बढती नियामक बोझ, सरकारी नए नियामक और गैर पारंपरिक वित्तीय संस्थानों की बढती प्रतियोगिता है.

2. बैंक क्या है और इसके क्या क्या कार्य है?


Bank एक ऐसी वित्तीय संस्था को कहा जाता है जो लोगों के पैसों जमा करती है और लोगों को क़र्ज़ देती है. बैंक हर प्रकार के क्षेत्र में इन्वेस्ट करती है चाहे वो लोगों को क़र्ज़ देना हो या फिर किसी प्रकार के बिज़नेस के लिए क़र्ज़ देना हो.

हर जरुरत को पूरा करने के लिए हमे पैसे की जरुरत पड़ती, पैसे हमेशा हम अपने पॉकेट में रखकर नहीं घूम सकते हैं. इसीलिए उसकी सुरक्षा के लिए एक अकाउंट का होना जरुरी है. इसीलिए हर किसी को यह जानना जरूरी है कि बैंक क्या है (What is bank in Hindi) और इसके लाभ क्या हैं?

इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि एक बैंक किस प्रकार से कार्य करता है इसके प्रकार कितने हैं और हमारी जिंदगी में इसका क्या महत्व है?

अगर कभी इसके बारे में ख्याल नहीं आया तो कोई बात नहीं इस पोस्ट में आपको इसके बारे में पूरी जानकारी मिलेगी. इसके साथ ही हम बैंक से संबंधित जानकारी और इसका इतिहास क्या है इस पोस्ट के माध्यम से जानेंगे. तो चलिए इस के बारे में जानना शुरू करते हैं.

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बैंक की जानकारी हिंदी में
Bank kya hai what is bank in hindi
बैंक ऐसी फाइनेंसियल संस्था होती है जहाँ से जरुरत पड़ने पर लोगों को लोन के रूप में क़र्ज़ दिया जाता है और लोग अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए इस में जमा कर के रखते हैं.

कुछ लोग ब्याज लेने के लिए भी पैसे जमा कर के रखते हैं और जब उन्हें जरुरत पड़ती है तो पैसे निकालते भी रहते हैं.

इस तरह आपको समझ में आ ही गया होगा की आखिर ये बैंक क्या होती है. इस में लोग जो पैसे जमा कर के रखते हैं उसे ये बिज़नेस मैन और ट्रेडर्स को इंटरेस्ट में देती है.

इससे ये इनकम करती है. आप तो जानते ही होंगे की बड़े बड़े बिज़नेस मैन अपने आधे पैसे इन्वेस्ट करते हैं और आधे पैसे लोन के रूप में लेते है.

बैंक के लिए इस तरह से बिज़नेस से अच्छी इंटरेस्ट मिल जाती है. कोई भी बिज़नेस बिना लोन लिए संभव नहीं है. क्यों की बड़े बिज़नेस में इन्वेस्टमेंट बहुत ज्यादा करनी होती है जो लोन के रूप में ही मिल सकता है.

ये सिर्फ पैसे जमा करने और लोन देने का ही काम नहीं करते बल्कि इसके अलावा भी दूसरे काम करती है.

लोगों के पास जो जेवरात गहने होती है उसे सुरक्षित रखने के लिए सुविधा प्रदान करती है साथ ही चेक सिस्टम से पैसे निकालने की सुविधा, बिल जमा करने के लिए काम करती है.

ये हमारे लिए बहुत फ़ायदेमंद है लेकिन हमने कभी ये जानने की कोशिश नहीं की होगी आखिर इस फैसिलिटी की शुरुआत कब से हुई है. चलिए हम इस के इतिहास के बारे में जानते हैं.

इंडिया को डिजिटल करने के लिए भी कदम उठाने की शुरुआत हो चुकी है. इसी कड़ी में गांव में रेहने वाले लोगों को भी अकाउंट खुलवाया जा रहा है. आप के पास भी अकाउंट जरूर होगा.

बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो एक से ज्यादा अकाउंट खुलवा के रखते हैं. समय ऐसा आ चुका है की लोगो को अब मोबाइल या इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा दी जाती है जिससे लोग अपने फ़ोन या कंप्यूटर से अपने अकाउंट की लेन-देन (ट्रांसैक्शन) बहुत ही आराम से कर लेते हैं.

बैंक का इतिहास – Bank History in Hindi?
पुराने समय में इस की शुरुआत ट्रेडर्स द्वारा prototype bank के रूप में की गई थी. उस वक़्त लोगो के बीच बार्टर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था.

बार्टर सिस्टम क्या है?

इस सवाल का जवाब ये है की पुराने टाइम में जब पैसे का चलन नहीं था तो उस वक़्त लोग एक वस्तु या सेवा के बदले दूसरी वस्तु या सेवा की लेन देन किया करते थे, जिसे वस्तु-विनिमय या बार्टर सिस्टम के नाम से जाना जाता है.

उदाहरण के लिए उस वक़्त एक गाय के बदले 10 बकरी का लेन देन होता था. इस सिस्टम का इस्तेमाल वहीँ किया जाता था जहाँ मुद्रा का इस्तेमाल नहीं होता.

अगर आपने ध्यान दिया होगा तो ये भी जानने को मिला होगा की पुराने समय में लोग ज़मीन की ख़रीद बिक्री भी दूसरे चीजों के बदले में करते थे.

मेरी जानकारी में भी एक केस मैंने ये पाया की पुराने जमाने के लोग 2-3 बकरी देकर ज़मीन के टुकड़े की अदला बदली भी कर लेते थे.

बार्टर सिस्टम की शुरुआत क़रीब 2000 BC में Assyria और बेबीलोनिया में हुआ था.

बाद में पुराने ग्रीस और रोमन एम्पायर के समय में टेम्पल्स में एस्टब्लिशेस लेंडर्स ने लोन की शुरुआत की और इस में 2 महत्वपूर्ण नए विचारो को जोड़ा.

दो महत्वपूर्ण विचार

पैसे का जमा करना
वस्तु के बदले पैसे की लेन देन
इसी बीच में चीन और इंडिया में भी पैसे की लेन देने का सिस्टम शुरू हो गया .

वैसे अगर कहा जाये तो भारत में बैंक से जुड़ी सुविधाओं का इतिहास 200 साल पुराना है. इंडिया में जो भी बैंक अभी हम देखते हैं उसकी शुरुआत भी ब्रिटिश शासन के समय में हुई थी.

19th शताब्दी के शुरुआत में ही ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने कई बैंको किं शुरुआत की. Bank of Bengal 1809, Bank of Bombay 1840 और Bank of Madras 1843. लेकिन बाद में इन तीनो को मिला कर इम्पीरियल बैंक बना दिया गया. लेकिन फिर बाद में इसे 1955 में मिला के भारतीय स्टेट (SBI) में बदल दिया गया.

इलाहाबाद बैंक भारत का पहला प्राइवेट बैंक था. 1935 में भारतीय रिज़र्व बैंक को स्थापित किया गया था और इसके बाद Punjab national bank, Bank Of India, Canara और Indian bank शुरू किये गए.

भारत की आज़ादी के बाद भारतीय RBI को केंद्रीय बैंक का दर्ज़ा दिया गया. उसे सभी बैंको का बैंक डिक्लेअर कर दिया गया.

सभी तरह की नीतियां को तय करने और उसे दूसरे बैंक और फाइनेंसियल इंस्टीटूशन द्वारा लागु करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गयी. इस में RBI का पूरा कंट्रोल ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

इंटरनेट क्या है और किसने बनाया है?
NEFT क्या है और कैसे काम करती है?
आईसीआईसीआई का फुल फॉर्म क्या है?
बैंक की परिभाषा
हर देश में इस की परिभाषा अलग अलग है. अपने काम के अनुसार प्रत्येक देश इस की परिभाषा देते हैं. अगर हम बात करे English Common Law के अनुसार जो परिभाषा दी गई उसके तहत एक बैंकर को आदमी के रूप में माना गया है जो इस से जुड़ा व्यापार करता है.

जैसे अपने कस्टमर के लिए अकाउंट शुरू करवाना, अकाउंट से जुड़े चेक को इशू करना डिपाजिट के पैसे को लेना और कस्टमर के लिए चेक को arrange करना.

दूसरे शब्दों में कहें तो ये एक ऐसी establishment है जो सरकार के द्वारा प्रमाणित होती है जो लोगों के पैसे जमा करती है, ब्याज चुकाती है, चेक को क्लियर करती है, लोन देती है.

इसके साथ ही जो ट्रांसक्शन किये जाते हैं उसका संचालन करती है. इसके अलावा और भी सेवाएं जैसे मोबाइल, इंटरनेट बैंकिंग इत्यादि देती है।

आज के भारत में बैंक व्यवस्था – Current Banking in India
आज के भारत में बैंकिंग सुविधाजनक और परेशानी मुक्त है. एक आम आदमी भी आसानी से लेन देन के काम को कर सकता है. इन के द्वारा दी जाने वाली अलग अलग सुविधाएँ ये हैं.

Bank Account :
ये बैंकिंग सेक्टर की सबसे आम या कॉमन सेवा हैं। कोई भी कभी भी अकाउंट खोल सकता है। इन में से कोई भी अकाउंट टाइप जैसे saving account, current account, deposit account खोल सकते है.

Loan Account :
मिडिल क्लास फैमिली में अक्सर लोग जॉब करते हैं और हर कुछ बड़े योजना को पूरा करने के लिए इस का रुख करते है.

मिडिल क्लास के एक आदमी की मंथली सैलरी इतनी नहीं होती की वो एक बार में उन पैसे से कोई बड़ा काम कर सके. इसीलिए उसे लोन लेने की जरुरत पड़ जाती है.

इस तरह से वो अलग अलग लोन जैसे होम लोन, पर्सनल लोन, एजुकेशन लोन और भी कई तरह के लोन ले सकता है.

इन लोन को देने के लिए लोन अकाउंट की सुविधा दी जाती है और इसे वापस चुकाने के लिए एक टाइम पीरियड फिक्स कर लिया जाता है. जिस समय के अंदर तक कस्टमर को सरे पैसे वापस देने होतेहैं.

Money Transfer :
दुनिया के किसी भी हिस्से से दूसरे हिस्से में पैसे भेजने के लिए ये बहुत तरह की सुविधाएँ देता है जैसे drafts, check. इत्यादि आजकल ऑनलाइन transaction से कौन वाकिफ नहीं है.

बस कुछ सेकंड्स में आप चाहे तो किसी भी अकाउंट में पैसे को ट्रांसफर कर सकते हैं. इस तरह की सुविधा हमे ये देती है.

शुरू में इसके लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता था लेकिन आज ऐसा समय आ चूका है की अपने फ़ोन के इस्तेमाल से हम पलक झपकते ही एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट को दुनिया के किसी भी हिस्से में पैसे भेज सकते हैं.

Credit & Debit Card :
आजकल हर बैंक क्रेडिट और डेबिट कार्ड की फैसिलिटी देते हैं. इन कार्ड्स के बहुत तरह के इस्तेमाल होते हैं. क्रेडिट कार्ड से कहीं भी शॉपिंग कर सकते हैं और ऑनलाइन सर्विस के लिए पैसे pay कर सकते हैं.

क्रेडिट कार्ड ऐसा कार्ड है जिसमे हमें कुछ limitation दी जाती है. जैसे मान लीजिये आपको मंथली 20,000 Rs. की लिमिट दी गई है तो आप चाहे तो इतने पैसे की शॉपिंग या सर्विस ख़रीद सकते हैं और फिर एक महीने के अंदर इस पैसे को बिना एक्स्ट्रा चार्ज दिए हुए चुका सकते हैं.

ये पैसे क्रेडिट कार्ड प्रोवाइडर pay करते हैं जिन्हे हम बाद में उसे चूकाते हैं.

डेबिट कार्ड हमारे अकाउंट में जमा पैसे से ही इस्तेमाल करते हैं. अकाउंट में जितना पैसा बैलेंस के रूप में होगा उसी का इस्तेमाल कर सकते हैं. बैलेंस ख़तम होने के बाद इसका प्रयोग नहीं हो सकता है.

Lockers:
बहुत सारे ऐसे बैंक हैं जो अपने कस्टमर को Locker की फैसिलिटी देते हैं जिसमे लोग अपने बहुत इम्पोर्टेन्ट डाक्यूमेंट्स और ज्वेलरी को सुरक्षा के लिए रख सकते हैं.

क्यों की घर में हर चीज़ जो कीमती है उसे रखना सुरक्षित नहीं है. इसीलिए लोग इस तरह के lockers का इस्तेमाल करते हैं और बिना किसी टेंशन लिए सुरक्षित रखते है.

NRI के लिए बैंकिंग सेवा
जो लोग इंडिया से बाहर रहते हैं वो भी अकाउंट खुलवा सकते हैं. NRI लगभग सभी भारतीय बैंको में अपना अकाउंट ओपन कर सकते हैं.

NRI के लिए 3 तरह के अकाउंट खोलने की सुविधा दी जाती है.

Non-resident Account(Simple) – NRO
NRI (External) Rupee Accounts – NRE
Non Resident (foreign currency) Account – FCNR
बैंक के प्रकार – Types of Bank in Hindi
भारत में बहुत तरह के कमर्शियल संसथान हैं. जिनको हम यहाँ अलग अलग केटेगरी के रूप में विभाजित करते हैं. तो चलिए इन के बारे में जानते हैं.

1. Central bank:
RBI भारत का सेंट्रल बैंक है जो भारत सरकार के अंतर्गत काम करता है. इसका सारा कंट्रोल सेंट्रल गवर्नमेंट के पास होता है.

इस का सारा कमांड एक गवर्नर को दिया जाता है जिसका चुनाव सेंट्रल गवर्नमेंट करती है. सेंट्रल बैंक ही देश की सारी बैंको को संचालन के लिए दिशा निर्देश देती है.

2. Public Sector bank :
SBI और उसके सभी एसोसिएट संस्थान एक ग्रुप के रूप में काम करती है जिसे ‘स्टेट बैंक ग्रुप’ के नाम से जाना जाता है. इस में 20 सदस्य हैं. रीजनल रूरल बैंक भी प्राइवेट सेक्टर के द्वारा ही स्पांसर किये जाते हैं.

3. Private Sector Bank :
प्राइवेट सेक्टर के अंतर्गत इस तरह के बैंक आते है.

An active foreign bank in India

Old- Generation

New generation

Non-Scheduled

Scheduled Co-operative

बैंक से लोन कैसे ले?
पर्सनल लोन कैसे लें?
4. Development Bank:
किसी स्पेशल सेक्टर के डेवलपमेंट या विकास के लिए जिन बैंको को शुरू किया जाता है उन्हें डेवलपमेंट बैंक बोला जाता है. जैसे बिज़नेस, कृषि, इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट, ये बहुत खास होते हैं जिनकी कुछ विशेस्ताएं मैं यहाँ बता रहा हूँ.

दूसरे साधारण बैंक्स की तरह ये जनता से पैसे को डिपाजिट करने का काम नहीं करती है.
ये commercial बैंक्स की तरह short term लोन नहीं बल्कि long term लोन देने का काम करते है.
इसका मुख्य काम अपने अंतर्गत आने वाले सेक्टर को लोन देना और बिज़नेस को तेज़ी से डेवेलोप करना और देश की प्रगति की रफ्तार को बढ़ाना है.
Industrial sector से related:

IDBI – Industrial development bank of India
UTI – Unit trust of India
ICICI Ltd. – Industrial Credit and Investment Corporation of Indian bank
IFCI – Industrial Finance Corporation of India Ltd.
SIDBI – Small Industrial Development Bank of India
Agriculture से related:

NABARD – National bank for Agriculture and Rural Development

LDB – Land Development Bank.

इसके 2 प्रकार होते हैं.

1. State-level

2. District Level

Import/Export related:
EXIM – Export-Import bank of India.

5. Cooperative Sector Bank :
इसे सहकारी बैंक के नाम से भी जाना जाता है. सहकारी टाइप ग्रामीण (रूरल) लोगों के लिए बहुत लाभ दायक होता है. इस तरह से सहकारी को भी 3 भागों में विभाजित किया जाता है।

Primary Agricultural Credit Society

State cooperative
Central cooperative
दोस्तोँ अब आप हमारे देश में बहुत तरह के established बैंक्स के बारे में जान चुके होंगे. साथ ही इनके काम क्या क्या है और किस आधार पर इन्हे अलग अलग भागो में बांटा गया है वो भी समझ चुके होंगे.

इस तरह पैसे जमा करने का इतिहास भारत में भी बहुत पुराना है जैसा की हमने देखा की पूरी दुनिया में इसका चलन कैसे और कहाँ से शुरू हुआ. साथ ही ये भी जानने को मिला की भारत में इसकी शुरुआत कैसे हुई.

बैंक के क्या क्या कार्य है?
पैसे जमा करना
लोगों को ऋण देना
लॉकर उपलब्ध कराना
वित्तीय सलाह देना
बचत को बढ़ावा देना
सोने और चांदी के वस्तुओं की सुरक्षा करना
मुद्रा व्यवस्था को लचीला बनाना
विकास कार्यों में सहयोग करना
सरकारी कार्यों में सहयोग करना
बैंक के लाभ – Benefits of Bank in hindi
आज के इस तेज गति से विकसित हो रहे दुनिया में बैंकों का स्थान काफी महत्वपूर्ण हो चुका है. चाहे किसी प्रकार की अर्थव्यवस्था हो विकसित या विकासशील बैंकों की जरूरत हमेशा होती है..

अगर हम अर्थव्यवस्था को शरीर कहे तो फिर बैंक उसकी फोन दौड़ने वाली नसों की नाडिया की तरह काम करती हैं

तो चलिए जान लेते हैं कि आखिर इस के क्या-क्या लाभ हैं

1. पूंजी का निर्माण
जो भी व्यापारी है फिर उद्योगपति होते हैं उनके हर प्रकार के पैसे को एक जगह जमा करके सुरक्षित तौर पर रखती है. उनका यह इलाज होता है कि अधिक से अधिक पैसे बैंक में हमेशा रहें ताकि वह अपना निवेश कर सकें.

इस प्रकार चाय व्यापारी हो या फिर उद्योगपति उनके पैसे एक जगह जमा होने से उनकी पूंजी बढ़ती चली जाती है.

किसी बड़े प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए यह फोन भी उनके काफी काम आती है.

2. बचत की इच्छा का पैदा होना
हर इंसान चाहता है कि जो भी वह कमाई करता हूं उसमें से वह कुछ पैसे बचा कर अपने भविष्य के लिए सुरक्षित रखें.

बल्ला और मुसीबत कभी भी आ सकती है और ऐसे समय में हमारी बचत राशि ही हमारी जान बचाती है.

अगर आप जानना चाहते हैं कि कम आय में भी पैसे की बचत कैसे करते हैं तो इसके लिए हमारे लिखे आर्टिकल पैसे कैसे बचाए को अवश्य पढ़ें.

अकाउंट होने पर हमें यह जरूर संतुष्टि होती है कि हमारे पास एक बचत राशि है और हम उसमें अपने पैसे सुरक्षित बचा कर रख सकते हैं.

3. बैंकिंग प्रणाली का डेवलपमेंट
खाता खोलने पर हमें दो ऑप्शन भी जाते हैं सेविंग अकाउंट और करंट अकाउंट. जो मैं अपनी सुविधा अनुसार अपने लिए चुन लेते हैं लेकिन बचत खाता अधिकतर लोगों की पहली पसंद होती है.

जैसे जैसे देश की आबादी बैंकों से जुड़ती चली जाती है तो बैंकिंग प्रणाली का भी इससे काफी विकास होता चला जाता है.

जो पैसे पहले लोगों के पॉकेट में रहते थे अब वह बैंक में जमा होने लगता है और इस प्रकार बैंक उसे अपने निवेश और मुनाफे के लिए प्रयोग करता है जिससे उसका खुद का विकास होता है.

4. पैसे ट्रांसफर करने में आसानी
जब भी हमें किसी दोस्त एवं रिश्तेदार या फिर किसी काम के लिए पैसे दूसरे को देने होते हैं तो इस व्यवस्था की वजह से ही हम आसानी से उन्हें मनचाहे रकम भेज सकते हैं.

यह सुरक्षित होता है और बहुत ही कम समय में पैसे ट्रांसफर हो जाते हैं.

5. रोजगार में बढ़ोतरी
जब वित्तीय व्यवस्थाओं का विकास होता है तो नए बैंकों का निर्माण भी होता है. बैंकों में काम करने के लिए और ज्यादा लोगों की जरूरत पड़ती है और इस प्रकार से नए रोजगार के अवसर भी बनते हैं

इस प्रकार से यह देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में भी काफी मदद करती हैं.

6. देश की आर्थिक अर्थव्यवस्था का विकास
हर देश की अपनी एक वित्तीय व्यवस्था होती है और उसी के आधार पर देश के सभी भागों में बैंकों का संचालन किया जाता है.

भारत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सभी बैंकों का संचालन करती है एवं जो आमदनी उन्हें सभी शाखाओं से होती हैं उसे सरकार अपनी आवश्यकताओं को पूर्ति करने के लिए इस्तेमाल करती है.

इस प्रकार सीधे तौर पर यह देश की आर्थिक मजबूती का काम करती है.

7. लोगों के लिए आर्थिक परामर्श
हर किसी को अपने भविष्य की चिंता शुरू से ही होती है. बच्चों की शादी घर का निर्माण इत्यादि कई प्रकार के ऐसे काम होते हैं जो इंसान काम करते हुए पूरा नहीं कर पाता.

बैंक में परामर्श भी रहती है कि वह कौन से तरीके हैं जिससे वह भविष्य में सभी काम आसानी से कर सकते हैं.

संक्षेप में
मैंने आपको इस पोस्ट में इससे जुड़े हर पहलु के बारे में जानकारी दी है. इस की परिभाषा क्या होती है (Definition of Bank in Hindi) भी बतायी.

किस तरह हर देश इसे अपने तरह से अपने शब्दों में परिभाषित करता है ये भी बताया. इस तरह इस वित्तीय संस्थान की जानकारी हिंदी में सरल शब्दों में देने की कोशिश की है.

आपको अक्सर कुछ ऐसी जरूरत पड़ती होगी जिसके बिना आपका काम नहीं बन सकता और आपको पैसे निकलने या जमा करने जाना ही पड़ता होगा.

चाहे आपके अपने लिए ATM कार्ड इशू करवाना हो या आपने किसी एग्जाम की फॉर्म भरने के लिए चालान कटवाना हो.

दोस्तों आपको बैंक क्या है इन हिंदी (What is Bank in Hindi) के बारे में अच्छे से समझ में आ गया होगा. इस पोस्ट के माध्यम से आपने आज जाना की बैंक के लाभ और इसके प्रकार क्या हैं (Types of bank in hindi).

दोस्तोँ मैं उम्मीद करता हूँ की आपको ये पोस्ट हेल्पफुल लगी होगी. अगर ये पोस्ट आपको पसंद आयी है तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर कीजिये और उन्हें भी इसकी जानकारी लेने का मौका दीजिये. इसे अपने फसबूक, ट्विटर, गूगल प्लस अकाउंट के माध्यम से सोशल मीडिया पर भी शेयर करे और इस ब्लॉग को आगे बढ़ने में मदद करे.

Wasim Akram
वसीम अकरम WTechni के मुख्य लेखक और संस्थापक हैं. इन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है लेकिन इन्हें ब्लॉगिंग और कैरियर एवं जॉब से जुड़े लेख लिखना काफी पसंद है.

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LED क्या है?
Freelancer क्या है और फ्रीलांसर कैसे बने?
वेब होस्टिंग क्या है – What is Web Hosting in Hindi?
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हर जरुरत को पूरा करने के लिए हमे पैसे की जरुरत पड़ती, पैसे हमेशा हम अपने पॉकेट में रखकर नहीं घूम सकते हैं. इसीलिए उसकी सुरक्षा के लिए एक अकाउंट का होना जरुरी है. इसीलिए हर किसी को यह जानना जरूरी है कि बैंक क्या है (What is bank in Hindi) और इसके लाभ क्या हैं?

इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि एक बैंक किस प्रकार से कार्य करता है इसके प्रकार कितने हैं और हमारी जिंदगी में इसका क्या महत्व है?

अगर कभी इसके बारे में ख्याल नहीं आया तो कोई बात नहीं इस पोस्ट में आपको इसके बारे में पूरी जानकारी मिलेगी. इसके साथ ही हम बैंक से संबंधित जानकारी और इसका इतिहास क्या है इस पोस्ट के माध्यम से जानेंगे. तो चलिए इस के बारे में जानना शुरू करते हैं.

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बैंक की जानकारी हिंदी में
Bank kya hai what is bank in hindi
बैंक ऐसी फाइनेंसियल संस्था होती है जहाँ से जरुरत पड़ने पर लोगों को लोन के रूप में क़र्ज़ दिया जाता है और लोग अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए इस में जमा कर के रखते हैं.

कुछ लोग ब्याज लेने के लिए भी पैसे जमा कर के रखते हैं और जब उन्हें जरुरत पड़ती है तो पैसे निकालते भी रहते हैं.

इस तरह आपको समझ में आ ही गया होगा की आखिर ये बैंक क्या होती है. इस में लोग जो पैसे जमा कर के रखते हैं उसे ये बिज़नेस मैन और ट्रेडर्स को इंटरेस्ट में देती है.

इससे ये इनकम करती है. आप तो जानते ही होंगे की बड़े बड़े बिज़नेस मैन अपने आधे पैसे इन्वेस्ट करते हैं और आधे पैसे लोन के रूप में लेते है.

बैंक के लिए इस तरह से बिज़नेस से अच्छी इंटरेस्ट मिल जाती है. कोई भी बिज़नेस बिना लोन लिए संभव नहीं है. क्यों की बड़े बिज़नेस में इन्वेस्टमेंट बहुत ज्यादा करनी होती है जो लोन के रूप में ही मिल सकता है.

ये सिर्फ पैसे जमा करने और लोन देने का ही काम नहीं करते बल्कि इसके अलावा भी दूसरे काम करती है.

लोगों के पास जो जेवरात गहने होती है उसे सुरक्षित रखने के लिए सुविधा प्रदान करती है साथ ही चेक सिस्टम से पैसे निकालने की सुविधा, बिल जमा करने के लिए काम करती है.

ये हमारे लिए बहुत फ़ायदेमंद है लेकिन हमने कभी ये जानने की कोशिश नहीं की होगी आखिर इस फैसिलिटी की शुरुआत कब से हुई है. चलिए हम इस के इतिहास के बारे में जानते हैं.

इंडिया को डिजिटल करने के लिए भी कदम उठाने की शुरुआत हो चुकी है. इसी कड़ी में गांव में रेहने वाले लोगों को भी अकाउंट खुलवाया जा रहा है. आप के पास भी अकाउंट जरूर होगा.

बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो एक से ज्यादा अकाउंट खुलवा के रखते हैं. समय ऐसा आ चुका है की लोगो को अब मोबाइल या इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा दी जाती है जिससे लोग अपने फ़ोन या कंप्यूटर से अपने अकाउंट की लेन-देन (ट्रांसैक्शन) बहुत ही आराम से कर लेते हैं.

बैंक का इतिहास – Bank History in Hindi?
पुराने समय में इस की शुरुआत ट्रेडर्स द्वारा prototype bank के रूप में की गई थी. उस वक़्त लोगो के बीच बार्टर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था.

बार्टर सिस्टम क्या है?

इस सवाल का जवाब ये है की पुराने टाइम में जब पैसे का चलन नहीं था तो उस वक़्त लोग एक वस्तु या सेवा के बदले दूसरी वस्तु या सेवा की लेन देन किया करते थे, जिसे वस्तु-विनिमय या बार्टर सिस्टम के नाम से जाना जाता है.

उदाहरण के लिए उस वक़्त एक गाय के बदले 10 बकरी का लेन देन होता था. इस सिस्टम का इस्तेमाल वहीँ किया जाता था जहाँ मुद्रा का इस्तेमाल नहीं होता.

अगर आपने ध्यान दिया होगा तो ये भी जानने को मिला होगा की पुराने समय में लोग ज़मीन की ख़रीद बिक्री भी दूसरे चीजों के बदले में करते थे.

मेरी जानकारी में भी एक केस मैंने ये पाया की पुराने जमाने के लोग 2-3 बकरी देकर ज़मीन के टुकड़े की अदला बदली भी कर लेते थे.

बार्टर सिस्टम की शुरुआत क़रीब 2000 BC में Assyria और बेबीलोनिया में हुआ था.

बाद में पुराने ग्रीस और रोमन एम्पायर के समय में टेम्पल्स में एस्टब्लिशेस लेंडर्स ने लोन की शुरुआत की और इस में 2 महत्वपूर्ण नए विचारो को जोड़ा.

दो महत्वपूर्ण विचार

पैसे का जमा करना
वस्तु के बदले पैसे की लेन देन
इसी बीच में चीन और इंडिया में भी पैसे की लेन देने का सिस्टम शुरू हो गया .

वैसे अगर कहा जाये तो भारत में बैंक से जुड़ी सुविधाओं का इतिहास 200 साल पुराना है. इंडिया में जो भी बैंक अभी हम देखते हैं उसकी शुरुआत भी ब्रिटिश शासन के समय में हुई थी.

19th शताब्दी के शुरुआत में ही ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने कई बैंको किं शुरुआत की. Bank of Bengal 1809, Bank of Bombay 1840 और Bank of Madras 1843. लेकिन बाद में इन तीनो को मिला कर इम्पीरियल बैंक बना दिया गया. लेकिन फिर बाद में इसे 1955 में मिला के भारतीय स्टेट (SBI) में बदल दिया गया.

इलाहाबाद बैंक भारत का पहला प्राइवेट बैंक था. 1935 में भारतीय रिज़र्व बैंक को स्थापित किया गया था और इसके बाद Punjab national bank, Bank Of India, Canara और Indian bank शुरू किये गए.

भारत की आज़ादी के बाद भारतीय RBI को केंद्रीय बैंक का दर्ज़ा दिया गया. उसे सभी बैंको का बैंक डिक्लेअर कर दिया गया.

सभी तरह की नीतियां को तय करने और उसे दूसरे बैंक और फाइनेंसियल इंस्टीटूशन द्वारा लागु करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गयी. इस में RBI का पूरा कंट्रोल ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

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आईसीआईसीआई का फुल फॉर्म क्या है?
बैंक की परिभाषा
हर देश में इस की परिभाषा अलग अलग है. अपने काम के अनुसार प्रत्येक देश इस की परिभाषा देते हैं. अगर हम बात करे English Common Law के अनुसार जो परिभाषा दी गई उसके तहत एक बैंकर को आदमी के रूप में माना गया है जो इस से जुड़ा व्यापार करता है.

जैसे अपने कस्टमर के लिए अकाउंट शुरू करवाना, अकाउंट से जुड़े चेक को इशू करना डिपाजिट के पैसे को लेना और कस्टमर के लिए चेक को arrange करना.

दूसरे शब्दों में कहें तो ये एक ऐसी establishment है जो सरकार के द्वारा प्रमाणित होती है जो लोगों के पैसे जमा करती है, ब्याज चुकाती है, चेक को क्लियर करती है, लोन देती है.

इसके साथ ही जो ट्रांसक्शन किये जाते हैं उसका संचालन करती है. इसके अलावा और भी सेवाएं जैसे मोबाइल, इंटरनेट बैंकिंग इत्यादि देती है।

आज के भारत में बैंक व्यवस्था – Current Banking in India
आज के भारत में बैंकिंग सुविधाजनक और परेशानी मुक्त है. एक आम आदमी भी आसानी से लेन देन के काम को कर सकता है. इन के द्वारा दी जाने वाली अलग अलग सुविधाएँ ये हैं.

Bank Account :
ये बैंकिंग सेक्टर की सबसे आम या कॉमन सेवा हैं। कोई भी कभी भी अकाउंट खोल सकता है। इन में से कोई भी अकाउंट टाइप जैसे saving account, current account, deposit account खोल सकते है.

Loan Account :
मिडिल क्लास फैमिली में अक्सर लोग जॉब करते हैं और हर कुछ बड़े योजना को पूरा करने के लिए इस का रुख करते है.

मिडिल क्लास के एक आदमी की मंथली सैलरी इतनी नहीं होती की वो एक बार में उन पैसे से कोई बड़ा काम कर सके. इसीलिए उसे लोन लेने की जरुरत पड़ जाती है.

इस तरह से वो अलग अलग लोन जैसे होम लोन, पर्सनल लोन, एजुकेशन लोन और भी कई तरह के लोन ले सकता है.

इन लोन को देने के लिए लोन अकाउंट की सुविधा दी जाती है और इसे वापस चुकाने के लिए एक टाइम पीरियड फिक्स कर लिया जाता है. जिस समय के अंदर तक कस्टमर को सरे पैसे वापस देने होतेहैं.

Money Transfer :
दुनिया के किसी भी हिस्से से दूसरे हिस्से में पैसे भेजने के लिए ये बहुत तरह की सुविधाएँ देता है जैसे drafts, check. इत्यादि आजकल ऑनलाइन transaction से कौन वाकिफ नहीं है.

बस कुछ सेकंड्स में आप चाहे तो किसी भी अकाउंट में पैसे को ट्रांसफर कर सकते हैं. इस तरह की सुविधा हमे ये देती है.

शुरू में इसके लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता था लेकिन आज ऐसा समय आ चूका है की अपने फ़ोन के इस्तेमाल से हम पलक झपकते ही एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट को दुनिया के किसी भी हिस्से में पैसे भेज सकते हैं.

Credit & Debit Card :
आजकल हर बैंक क्रेडिट और डेबिट कार्ड की फैसिलिटी देते हैं. इन कार्ड्स के बहुत तरह के इस्तेमाल होते हैं. क्रेडिट कार्ड से कहीं भी शॉपिंग कर सकते हैं और ऑनलाइन सर्विस के लिए पैसे pay कर सकते हैं.

क्रेडिट कार्ड ऐसा कार्ड है जिसमे हमें कुछ limitation दी जाती है. जैसे मान लीजिये आपको मंथली 20,000 Rs. की लिमिट दी गई है तो आप चाहे तो इतने पैसे की शॉपिंग या सर्विस ख़रीद सकते हैं और फिर एक महीने के अंदर इस पैसे को बिना एक्स्ट्रा चार्ज दिए हुए चुका सकते हैं.

ये पैसे क्रेडिट कार्ड प्रोवाइडर pay करते हैं जिन्हे हम बाद में उसे चूकाते हैं.

डेबिट कार्ड हमारे अकाउंट में जमा पैसे से ही इस्तेमाल करते हैं. अकाउंट में जितना पैसा बैलेंस के रूप में होगा उसी का इस्तेमाल कर सकते हैं. बैलेंस ख़तम होने के बाद इसका प्रयोग नहीं हो सकता है.

Lockers:
बहुत सारे ऐसे बैंक हैं जो अपने कस्टमर को Locker की फैसिलिटी देते हैं जिसमे लोग अपने बहुत इम्पोर्टेन्ट डाक्यूमेंट्स और ज्वेलरी को सुरक्षा के लिए रख सकते हैं.

क्यों की घर में हर चीज़ जो कीमती है उसे रखना सुरक्षित नहीं है. इसीलिए लोग इस तरह के lockers का इस्तेमाल करते हैं और बिना किसी टेंशन लिए सुरक्षित रखते है.

NRI के लिए बैंकिंग सेवा
जो लोग इंडिया से बाहर रहते हैं वो भी अकाउंट खुलवा सकते हैं. NRI लगभग सभी भारतीय बैंको में अपना अकाउंट ओपन कर सकते हैं.

NRI के लिए 3 तरह के अकाउंट खोलने की सुविधा दी जाती है.

Non-resident Account(Simple) – NRO
NRI (External) Rupee Accounts – NRE
Non Resident (foreign currency) Account – FCNR
बैंक के प्रकार – Types of Bank in Hindi
भारत में बहुत तरह के कमर्शियल संसथान हैं. जिनको हम यहाँ अलग अलग केटेगरी के रूप में विभाजित करते हैं. तो चलिए इन के बारे में जानते हैं.

1. Central bank:
RBI भारत का सेंट्रल बैंक है जो भारत सरकार के अंतर्गत काम करता है. इसका सारा कंट्रोल सेंट्रल गवर्नमेंट के पास होता है.

इस का सारा कमांड एक गवर्नर को दिया जाता है जिसका चुनाव सेंट्रल गवर्नमेंट करती है. सेंट्रल बैंक ही देश की सारी बैंको को संचालन के लिए दिशा निर्देश देती है.

2. Public Sector bank :
SBI और उसके सभी एसोसिएट संस्थान एक ग्रुप के रूप में काम करती है जिसे ‘स्टेट बैंक ग्रुप’ के नाम से जाना जाता है. इस में 20 सदस्य हैं. रीजनल रूरल बैंक भी प्राइवेट सेक्टर के द्वारा ही स्पांसर किये जाते हैं.

3. Private Sector Bank :
प्राइवेट सेक्टर के अंतर्गत इस तरह के बैंक आते है.

An active foreign bank in India

Old- Generation

New generation

Non-Scheduled

Scheduled Co-operative

बैंक से लोन कैसे ले?
पर्सनल लोन कैसे लें?
4. Development Bank:
किसी स्पेशल सेक्टर के डेवलपमेंट या विकास के लिए जिन बैंको को शुरू किया जाता है उन्हें डेवलपमेंट बैंक बोला जाता है. जैसे बिज़नेस, कृषि, इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट, ये बहुत खास होते हैं जिनकी कुछ विशेस्ताएं मैं यहाँ बता रहा हूँ.

दूसरे साधारण बैंक्स की तरह ये जनता से पैसे को डिपाजिट करने का काम नहीं करती है.
ये commercial बैंक्स की तरह short term लोन नहीं बल्कि long term लोन देने का काम करते है.
इसका मुख्य काम अपने अंतर्गत आने वाले सेक्टर को लोन देना और बिज़नेस को तेज़ी से डेवेलोप करना और देश की प्रगति की रफ्तार को बढ़ाना है.
Industrial sector से related:

IDBI – Industrial development bank of India
UTI – Unit trust of India
ICICI Ltd. – Industrial Credit and Investment Corporation of Indian bank
IFCI – Industrial Finance Corporation of India Ltd.
SIDBI – Small Industrial Development Bank of India
Agriculture से related:

NABARD – National bank for Agriculture and Rural Development

LDB – Land Development Bank.

इसके 2 प्रकार होते हैं.

1. State-level

2. District Level

Import/Export related:
EXIM – Export-Import bank of India.

5. Cooperative Sector Bank :
इसे सहकारी बैंक के नाम से भी जाना जाता है. सहकारी टाइप ग्रामीण (रूरल) लोगों के लिए बहुत लाभ दायक होता है. इस तरह से सहकारी को भी 3 भागों में विभाजित किया जाता है।

Primary Agricultural Credit Society

State cooperative
Central cooperative
दोस्तोँ अब आप हमारे देश में बहुत तरह के established बैंक्स के बारे में जान चुके होंगे. साथ ही इनके काम क्या क्या है और किस आधार पर इन्हे अलग अलग भागो में बांटा गया है वो भी समझ चुके होंगे.

इस तरह पैसे जमा करने का इतिहास भारत में भी बहुत पुराना है जैसा की हमने देखा की पूरी दुनिया में इसका चलन कैसे और कहाँ से शुरू हुआ. साथ ही ये भी जानने को मिला की भारत में इसकी शुरुआत कैसे हुई.

बैंक के क्या क्या कार्य है?
पैसे जमा करना
लोगों को ऋण देना
लॉकर उपलब्ध कराना
वित्तीय सलाह देना
बचत को बढ़ावा देना
सोने और चांदी के वस्तुओं की सुरक्षा करना
मुद्रा व्यवस्था को लचीला बनाना
विकास कार्यों में सहयोग करना
सरकारी कार्यों में सहयोग करना
बैंक के लाभ – Benefits of Bank in hindi
आज के इस तेज गति से विकसित हो रहे दुनिया में बैंकों का स्थान काफी महत्वपूर्ण हो चुका है. चाहे किसी प्रकार की अर्थव्यवस्था हो विकसित या विकासशील बैंकों की जरूरत हमेशा होती है..

अगर हम अर्थव्यवस्था को शरीर कहे तो फिर बैंक उसकी फोन दौड़ने वाली नसों की नाडिया की तरह काम करती हैं

तो चलिए जान लेते हैं कि आखिर इस के क्या-क्या लाभ हैं

1. पूंजी का निर्माण
जो भी व्यापारी है फिर उद्योगपति होते हैं उनके हर प्रकार के पैसे को एक जगह जमा करके सुरक्षित तौर पर रखती है. उनका यह इलाज होता है कि अधिक से अधिक पैसे बैंक में हमेशा रहें ताकि वह अपना निवेश कर सकें.

इस प्रकार चाय व्यापारी हो या फिर उद्योगपति उनके पैसे एक जगह जमा होने से उनकी पूंजी बढ़ती चली जाती है.

किसी बड़े प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए यह फोन भी उनके काफी काम आती है.

2. बचत की इच्छा का पैदा होना
हर इंसान चाहता है कि जो भी वह कमाई करता हूं उसमें से वह कुछ पैसे बचा कर अपने भविष्य के लिए सुरक्षित रखें.

बल्ला और मुसीबत कभी भी आ सकती है और ऐसे समय में हमारी बचत राशि ही हमारी जान बचाती है.

अगर आप जानना चाहते हैं कि कम आय में भी पैसे की बचत कैसे करते हैं तो इसके लिए हमारे लिखे आर्टिकल पैसे कैसे बचाए को अवश्य पढ़ें.

अकाउंट होने पर हमें यह जरूर संतुष्टि होती है कि हमारे पास एक बचत राशि है और हम उसमें अपने पैसे सुरक्षित बचा कर रख सकते हैं.

3. बैंकिंग प्रणाली का डेवलपमेंट
खाता खोलने पर हमें दो ऑप्शन भी जाते हैं सेविंग अकाउंट और करंट अकाउंट. जो मैं अपनी सुविधा अनुसार अपने लिए चुन लेते हैं लेकिन बचत खाता अधिकतर लोगों की पहली पसंद होती है.

जैसे जैसे देश की आबादी बैंकों से जुड़ती चली जाती है तो बैंकिंग प्रणाली का भी इससे काफी विकास होता चला जाता है.

जो पैसे पहले लोगों के पॉकेट में रहते थे अब वह बैंक में जमा होने लगता है और इस प्रकार बैंक उसे अपने निवेश और मुनाफे के लिए प्रयोग करता है जिससे उसका खुद का विकास होता है.

4. पैसे ट्रांसफर करने में आसानी
जब भी हमें किसी दोस्त एवं रिश्तेदार या फिर किसी काम के लिए पैसे दूसरे को देने होते हैं तो इस व्यवस्था की वजह से ही हम आसानी से उन्हें मनचाहे रकम भेज सकते हैं.

यह सुरक्षित होता है और बहुत ही कम समय में पैसे ट्रांसफर हो जाते हैं.

5. रोजगार में बढ़ोतरी
जब वित्तीय व्यवस्थाओं का विकास होता है तो नए बैंकों का निर्माण भी होता है. बैंकों में काम करने के लिए और ज्यादा लोगों की जरूरत पड़ती है और इस प्रकार से नए रोजगार के अवसर भी बनते हैं

इस प्रकार से यह देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में भी काफी मदद करती हैं.

6. देश की आर्थिक अर्थव्यवस्था का विकास
हर देश की अपनी एक वित्तीय व्यवस्था होती है और उसी के आधार पर देश के सभी भागों में बैंकों का संचालन किया जाता है.

भारत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सभी बैंकों का संचालन करती है एवं जो आमदनी उन्हें सभी शाखाओं से होती हैं उसे सरकार अपनी आवश्यकताओं को पूर्ति करने के लिए इस्तेमाल करती है.

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हर किसी को अपने भविष्य की चिंता शुरू से ही होती है. बच्चों की शादी घर का निर्माण इत्यादि कई प्रकार के ऐसे काम होते हैं जो इंसान काम करते हुए पूरा नहीं कर पाता.

बैंक में परामर्श भी रहती है कि वह कौन से तरीके हैं जिससे वह भविष्य में सभी काम आसानी से कर सकते हैं.

संक्षेप में
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किस तरह हर देश इसे अपने तरह से अपने शब्दों में परिभाषित करता है ये भी बताया. इस तरह इस वित्तीय संस्थान की जानकारी हिंदी में सरल शब्दों में देने की कोशिश की है.

आपको अक्सर कुछ ऐसी जरूरत पड़ती होगी जिसके बिना आपका काम नहीं बन सकता और आपको पैसे निकलने या जमा करने जाना ही पड़ता होगा.

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दोस्तों आपको बैंक क्या है इन हिंदी (What is Bank in Hindi) के बारे में अच्छे से समझ में आ गया होगा. इस पोस्ट के माध्यम से आपने आज जाना की बैंक के लाभ और इसके प्रकार क्या हैं (Types of bank in hindi).

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