सोचिए: एक बंदरगाह जो मानसून, तेज हवा या ठंड में भी बंद न हो—यही ऑल-वेदर पोर्ट हैं। ये ऐसे पोर्ट होते हैं जिन्हें साल भर संचालन के लिए डिजाइन किया जाता है ताकि निर्यात-आयात और आपूर्ति शृंखला में रुकावट न आए। व्यापारियों, शिपिंग कंपनियों और स्थानीय उद्योगों के लिए यह सुविधा बहुत बड़ा फायदा है।
इन बंदरगाहों में कुछ खास तकनीकी और लॉजिस्टिक उपाय होते हैं: गहरे ड्राफ्ट वाले बर्थ ताकि बड़े जहाज आ सकें; मजबूत ब्रेकवॉटर और टर्मिनल संरचनाएं जो तूफान से बचाती हैं; सालभर पायलट और टग सेवाएँ; 24x7 नेविगेशनल लाईट्स और आधुनिक राडार/एड्स। इसके अलावा कुशल क्रेन, कंटेनर हैंडलिंग सिस्टम, कवर किए हुए गोदाम और ड्रेनिंग सिस्टम भी आम हैं ताकि भारी बारिश में माल सुरक्षित रहे।
एक और जरूरी बात है hinterland connectivity यानी सड़क-रेल कनेक्शन। अच्छा कनेक्शन होने पर सामान जल्दी अंदर-बाहर हो जाता है, लागत कम रहती है और डिलीवरी समय निश्चित रहता है।
आप व्यापारी हैं तो किस पोर्ट का चुनाव कैसे करें? पहले पोर्ट का औसतन बंद होने का रिकॉर्ड देखें—कितने दिनों के लिए बंद रहता है। ड्राफ्ट और बर्थ की उपलब्धता चेक करें, खासकर सीज़न में। कस्टम्स क्लियरेंस की प्रक्रिया और टर्नअराउंड टाइम जानें। गोदाम, ठंडी भंडारण, और स्टैकिंग जगह कितनी है, यह भी मायने रखता है।
टैरिफ और हैंडलिंग चार्ज पर भी ध्यान दें। कभी-कभी सस्ता टैरिफ पर लेनदेन में देर होती है, जिससे कुल लागत बढ़ जाती है। डिजिटल सुरक्षा और ई-डॉक्यूमेंटेशन की सुविधा चाहिए—आजकल तेज़ क्लियरेंस के लिए यह जरूरी हो गया है।
पर्यावरण और जोखिम प्रबंधन देखें: क्या पोर्ट में सस्टेनेबिलिटी फीचर्स हैं जैसे ड्रेजिंग का जिम्मेदार प्रबंधन, तेल रिसाव रोकने के उपाय और फ्लड प्रोटेक्शन? ये चीज़ें लंबे समय में आपकी सप्लाई चेन सुरक्षित रखेंगी।
अंत में, रणनीतिक लिहाज़ से ऑल-वेदर पोर्ट आपके व्यापार को अनिश्चित मौसम और वैश्विक शिपिंग चेंजेज से बचाता है। अगर आप निर्यात-आयात या निर्माता हैं, तो पोर्ट का सही चुनाव समय और पैसे दोनों बचाता है।
अगर चाहें, हम आपकी सुविधानुसार पास के प्रमुख ऑल-वेदर पोर्ट्स और उनके फीचर्स की सूची तैयार कर सकते हैं—बताइए किस क्षेत्र में एक्टिव हैं, मैं मदद कर दूंगा।
केंद्रीय कैबिनेट ने महाराष्ट्र के वधावन में एक ऑल-वेदर डीप-वॉटर पोर्ट के निर्माण की मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की लागत Rs 76,220 करोड़ है और इससे 12 लाख रोजगार के अवसर उत्पन्न होने की उम्मीद है। महत्वपूर्ण भारत-यूरोप कॉरिडोर का हिस्सा बनेगा।
जून 20 2024