राज्यसभा नामांकन क्या है और क्यों मायने रखता है?

राज्यसभा के नामांकन पर हर बड़ा और छोटा राजनीतिक खेल टिका होता है। सवाल सरल है: कौन सदस्य बनेगा और उसका असर क्या होगा। यह सिर्फ एक औपचारिक कदम नहीं, बल्कि राज्य और केंद्र दोनों स्तर पर राजनीतिक संतुलन बदलने की ताकत रखता है।

नामांकन और योग्यता

दो तरह के नामांकन होते हैं — राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य और चुनाव के जरिए चुने जाने वाले सदस्य। राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्यों को कला, विज्ञान, साहित्य या समाजसेवा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के आधार पर बुलाया जाता है।

जो सदस्य चुनाव से आते हैं, उनके लिए सामान्य योग्यता यह है कि वे भारतीय नागरिक हों और न्यूनतम आयु 30 वर्ष हो। उम्मीदवारों का नामांकन राज्य के चुनाव अधिकारी के पास दायर किया जाता है और शॉर्टलिस्टिंग, जांच व वापसी की तारीखें रहती हैं।

वोटिंग प्रक्रिया और किस तरह जीता जाता है

राज्यसभा के चुनावों में आम जनता वोट नहीं देती; राज्य विधानसभाओं के सदस्य (MLAs) वोट देते हैं। मतदान प्रणाली 'एकक्रमिक स्थानांतरणीय वोट' यानी single transferable vote पर आधारित होती है। इसका मतलब यह है कि जीत के लिए सिर्फ सीधी बहुमत नहीं बल्कि एक कोटा पूरा करना होता है—जिसे विधानसभा की कुल संख्या और खाली सीटों के आधार पर निकाला जाता है।

सरल भाषा में समझें तो: बड़ी पार्टी या गठबंधन के पास जितने MLA होंगे, उतनी ही सीटें जीतने की उनकी सम्भावना ज्यादा होगी। छोटे दल गठबंधन या लेन-देन से सीटें पा सकते हैं।

चुनावी दिन से पहले नामांकन दाखिल करने, उसका सत्यापन और अंतिम सूची जारी होने के बाद उम्मीदवारों का प्रचार और पार्टी-लेवल रणनीति शुरू हो जाती है। उम्मीदवार वापसी भी कर सकते हैं—कई बार यह गठबंधन तय करने या विरोधी को कमजोर करने के लिए होता है।

राजनीतिक रणनीति में आम तौर पर तीन बातें मायने रखती हैं: (1) एमएलए गिनती और लॉयल्टी—किसने किसे वोट देगा, (2) गठबंधन और सौदे—छोटे दलों से समझौता, (3) निर्विरोध जीत के लिए नामांकन की टाइमिंग। कभी-कभी पार्टियाँ सम्मानित चेहरे (बॉलीवुड, खेल, साहित्य के) खड़ी करती हैं ताकि उनका सार्वजनिक और моральिक असर पड़े।

क्या आप एक उम्मीदवार हैं या सिर्फ पढ़ना चाह रहे हैं? उम्मीदवारों के लिए सुझाव सरल हैं: अपनी पार्टी के साथ स्पष्ट संवाद रखें, विधिक दस्तावेज समय पर जमा करें और संभावित अल्टरनेट गठबंधनों को समझें। आम नागरिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि राज्यसभा के चुनाव सीधे तौर पर उनके रोज़मर्रा के फैसलों को प्रभावित करते हैं, क्योंकि ये सांसद कानून बनाने और राज्यों के हितों की रक्षा करते हैं।

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सुनैत्रा पवार राज्यसभा नामांकन पर कोई विवाद नहीं: प्रफुल पटेल का बयान
सुनैत्रा पवार राज्यसभा नामांकन एनसीपी प्रफुल पटेल

सुनैत्रा पवार राज्यसभा नामांकन पर कोई विवाद नहीं: प्रफुल पटेल का बयान

एनसीपी की प्रमुख और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनैत्रा पवार ने मुंबई में राज्यसभा सीट के लिए नामांकन भरा। नामांकन के दौरान एनसीपी नेता अजित पवार, प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल उपस्थित थे। इस मौके पर शिवसेना और बीजेपी के वरिष्ठ नेता नहीं थे। प्रफुल पटेल ने बताया कि अंदरूनी असहमति की कोई बात नहीं है और सुनैत्रा का चुनाव एक अभिप्रेत निर्णय था।

जून 14 2024