रथ निर्माण एक तकनीक और समाज की रीति दोनों है। त्योहारों में बड़े रथ की जिम्मेदारी केवल निर्माण तक सीमित नहीं रहती; डिजाइन, सुरक्षा और रखरखाव पर भी ध्यान देना जरूरी है। क्या आप मंदिर या गांव के रथ का काम शुरू कर रहे हैं? यह गाइड वही बातें बताएगा जो तुरंत काम आएँगी।
सबसे पहले सही लकड़ी चुनना जरूरी है। साल, सागवान (तेक), और जॅकफ्रूट जैसी टिकाऊ लकड़ियाँ रथ के ढांचे के लिए उपयुक्त रहती हैं। भारी भार वाले हिस्सों में मोटी बीम और आयरन स्ट्रैप का इस्तेमाल करें। पहियों के लिए मजबूत लकड़ी और लोहे की अँगूठी जरूरी है ताकि चलते समय घिसाव कम हो।
किसे रखें? एक अनुभवी बढ़ई-कारिगर, लोहार, रंगकार और अगर मूर्ति स्थापित हो तो कुश्ती/प्रतिमा विशेषज्ञ। काम बाँट दें: डिजाइन-नियम, फ्रेमिंग, पहिये और रस्सी, अंतिम सजावट।
डिजाइन तय करें: रथ की ऊँचाई, चौड़ाई और वजन पहले से लिखें। आधार मजबूत रखें—नीचे की बीमें क्रॉस-लिंक कर के भार समान बँटता है।
फ्रेम बनाते समय जोड़ों पर मोर्टाइस-टेनॉन या बॉल्ट दोनों लागू रखें; केवल कील पर भरोसा मत रखें। प्लेटफॉर्म और मचान पर फर्श बोर्ड कसकर लगाएँ और किनारों पर रेलिंग रखें ताकि भीड़ में कोई गिरने का खतरा न हो।
पहियों की बनावट पर ध्यान दें: बड़े रथ के पहिये मोटे स्पोक और लोहे की टायर के साथ बनते हैं। एक्सल ठीक साइज का होना चाहिए और घर्षण कम करने के लिए बशिंग/बेयरिंग का प्रबंध रखें।
देहलीज और रस्सी: रस्सी की मोटाई और लंबाई उस भार के हिसाब से तय करें। केनवास या मॉडर्न फाइबर-रस्सी इस्तेमाल करें तो हॉकी शॉर्टिंग व ट्रेनिंग करके खींचने वालों की सुरक्षा बढ़ती है।
सजावट और फिनिशिंग में पारंपरिक नक्काशी, पेंट और प्राकृतिक वार्निश बेहतर टिकाव देते हैं। रंग लगाते समय मौसम-रोधक पेंट चुनें और धूप/बारिश से बचाने हेतु ऊपर से कवर्ड कैनोपी रखें।
सुरक्षा और अनुमति: रथ चलाने से पहले स्थानीय पुलिस, फायर ब्रिगेड और नगर निकाय को सूचित करें। मार्ग का मेडिकल और भीड़ प्रबंधन प्लान बनाएं। परीक्षण रूट चलाएं—खाली रथ को कुछ किलोमीटर घुमाकर संतुलन और ब्रेकिंग की जांच करें।
रखरखाव और भंडारण: हर साल ओवरहॉल करें—नए बोन्ट्स लगवाएँ, लकड़ी पर कीट-नाशक और फंगीसाइड लगवाएं। बरसात में सूखा गोदाम रखें और धूल से बचाने के लिए कवर लगाएँ। छोटे-छोटे दरारें समय पर भरें, बड़ी मरम्मत छूटी तो बड़ा खर्च और जोखिम बढ़ेगा।
तैयारी की सलाह: योजना कम से कम 2–3 महीने पहले शुरू करें, जरूरी पुर्जों की सूची बनाएं और स्थानीय कारीगरों से कीमतें पूछ लें। फोटोडॉक्यूमेंटेशन रखें ताकि भविष्य में रिस्टोरेशन आसान रहे।
रथ निर्माण में परंपरा और तकनीक साथ चलती है। जहां पुराने तरीकों का सम्मान करें, वहीं आधुनिक सुरक्षा और सामग्री को अपनाने से रथ ज्यादा दिनों तक सुरक्षित रहेगा। अगर आप चाहें तो स्थानीय कारीगरों से संपर्क कर के शुरुआती स्केच और बचत सलाह ले सकते हैं।
पुरी में होने वाली रथ यात्रा के लिए 200 से अधिक कारीगर तीन रथ बना रहे हैं, जिनमें 78 महाराणा सेवक शामिल हैं। ये चमत्कारी रथ बिना किसी कील या मशीन के, पूरी तरह पारंपरिक शिल्पकला से तैयार किए जा रहे हैं। 2025 की रथ यात्रा 27 जून को होगी, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेंगे।
जून 12 2025