क्या आप जानते हैं कि भारत में सेना दिवस हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है? इस दिन भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर‑इन‑चीफ ने पद संभाला था और देश ने अपनी सैन्य शक्ति और बहादुरी को सराहा। सेना दिवस सिर्फ परेड नहीं है — यह उन लाखों सैनिकों की मेहनत, त्याग और सुरक्षा के प्रति सम्मान जताने का दिन है जो हमारी सीमाओं पर चौकसी करते हैं।
15 जनवरी का दिन इसलिए खास है क्योंकि इस दिन 1949 में भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर‑इन‑चीफ ने जिम्मेवारी संभाली थी। तब से यह दिन परेड, सम्मान समारोह और सार्वजनिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जा रहा है। इसे देखने से आपको सेना की तैयारी, उपकरण और रणनीति का भी अंदाजा मिलता है। सबसे बड़ी परेड आमतौर पर नई दिल्ली में होती है, जिसमें मार्च‑पास, हथियार प्रदर्शन और वायुसेना का फ्लाईपास शामिल रहता है।
यह दिन सिर्फ राष्ट्रीय समारोह ही नहीं है। परिवारों के लिए भी यह मौका है कि वे सैनिकों की कहानियाँ सुनें, स्कूलों में देशभक्ति की बात हो और युवा पीढ़ी को देश‑सेवा के लिए प्रेरणा मिले। कई बार सरकारी इवेंट्स में वीरता पुरस्कारों का भी ऐलान होता है, जो सैन्य सदस्यों की बहादुरी को मान्यता देता है।
आप घर या स्कूल से भी सैनिकों का सम्मान कर सकते हैं। कुछ आसान सुझाव:
अगर आप आयोजक हैं तो छोटी‑छोटी बातों का ध्यान रखें: वक्त का पालन, सम्मान समारोह में सादगी और पूर्व सैनिकों की सहज भागीदारी। इससे कार्यक्रम प्रभावी और यादगार बनता है।
सेना दिवस पर बच्चों से बात करना आसान रखें — जटिल शब्दों की बजाय कहानियाँ सुनाएँ: कैसे एक सैनिक अपनी पोस्ट पर रहता है, सीमाओं पर क्या चुनौतियाँ होती हैं और देश के लिए उनका योगदान क्या महत्व रखता है। यह सीधे-सीधे राष्ट्रीय भावनाओं को जोड़ता है।
अंत में, सेना दिवस एक मौका है यह सोचने का कि हम अपने सैनिकों के लिए रोज क्या कर सकते हैं — सिर्फ तारीफ नहीं, बल्कि सहारा और समझ भी देना चाहिए। छोटे कदम जैसे उनके परिवारों की मदद, सैनिक कल्याण में योगदान और सही जानकारी फैलाना बहुत फर्क डालते हैं।
हर साल 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस मनाया जाता है, जो भारतीय सेना के उन बहादुर योद्धाओं को सम्मानित करता है जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपनी जान निछावर कर दी। यह दिन फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा के भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बनने की याद में मनाया जाता है। इस मौके पर देशभर में विभिन्न समारोह होते हैं, खासकर दिल्ली के करिअप्पा परेड मैदान में।
जनवरी 15 2025