कैथोलिक चर्च — क्या उम्मीद रखें और कैसे जुड़ें

क्या आपने कभी सोचा है कि कैथोलिक चर्च में जाना कैसा रहता है? यहाँ सिर्फ प्रार्थना नहीं होती—यह समाज, परंपरा और सेवा का संगम है। भारत में कैथोलिक समुदाय विविध है और हर जगह मिलने वाली छोटी-छोटी बातें आपको सहज महसूस कराती हैं।

सीधी बात: अगर आप पहली बार जा रहे हैं तो礼 (स्केच)—मास का हिस्सा बनना आसान है। मास मंदिर जैसी नहीं, बल्कि एक साझा प्रार्थना और रिवाज का कार्यक्रम है। आमतौर पर कार्यक्रम में गाना, पाठ, प्रसंग (प्रेयर), और संचार (कम्यूनियन) शामिल होते हैं।

कैथोलिक चर्च के प्रमुख संप्रदाय और भाषा

भारत में तीन बड़ी पहचान मिलेंगी—लैटिन (Roman), सायरो-मलबार और सायरो-मलनकर। केरल में सायरो-मलबार और सायरो-मलनकर खास लोकप्रिय हैं, जबकि गोवा और शहरों में लैटिन चर्च अधिक दिखते हैं। पूजा भाषाएँ स्थानीय भाषा, अंग्रेज़ी और कभी-कभी लैटिन भी होती हैं।

ध्यान देने वाली बात: संप्रदाय के हिसाब से रीति-रिवाज़ और म्यूजिक अलग होगा। कुछ चर्चों में पारंपरिक गाना-बजाना और लम्बी प्रार्थना होती है; कुछ में आधुनिक भजन भी होते हैं।

पहली बार जाने वाले के लिए व्यावहारिक टिप्स

पहला नियम—शांत और सहज रहें। आप चाहें तो सिर्फ बैठकर सुन सकते हैं। यदि आप कम्यूनियन (प्रसाद) लेना चाहते हैं तो आमतौर पर केवल मतवाले कैथोलिक लेते हैं; बाहर वालों को हाथ जोड़कर सम्मान जताना चाहिए।

ड्रेसिंग: सादा और शालीन कपड़े पहनें। कुछ पवित्र अवसर पर महिलाएँ सिर पर स्कार्फ रखती हैं—यह जरूरी नहीं लेकिन सम्मान माना जाता है।

मास के समय जानें: रविवार की सुबह सबसे सामान्य है, पर शाम या हफ्ते में भी शॉर्ट मास होती है। अपने नजदीकी पारिश का समय डायोसीज़ की वेबसाइट या फेसबुक पेज से चेक कर लें।

सवाल पूछना चाहते हैं? पादरी या चर्च वर्कर से मिलकर आप बपतिस्मा, विवाह, कन्फर्मेशन या चर्च की सेवा के बारे में जानकारी ले सकते हैं। बच्‍चों के लिए कैथोलिक स्कूल और कैटेकिज़म क्लासेस भी जुड़े होते हैं।

चर्च सिर्फ पूजा नहीं—यह सेवा भी है। अस्पताल, स्कूल और अनाथालयों के जरिए कैथोलिक समुदाय स्थानीय समाज में बड़ा काम करता है। उत्सवों में क्रिसमस और ईस्टर सबसे बड़े होते हैं; इन दिनों पर पारंपरिक प्रार्थना, गीत और सामूहिक भोज होते हैं।

अगर आप सक्रिय होना चाहते हैं तो वालंटियरशिप शुरू करें—भोजन वितरण, शिक्षा सहायता या समारोह आयोजन में मदद मिलती है। इससे आप तुरंत समुदाय का हिस्सा बन जाते हैं।

अंत में, खुले मन से जाएँ और देखें कि कौन-सी परंपरा आपके साथ मेल खाती है। चर्च में अनुभव व्यक्तिगत होता है—कुछ लोग शांति और ध्यान पाते हैं, कुछ लोग समुदाय और सेवा से जुड़ते हैं। अगर आप चाहें तो अपने नज़दीकी पारिश का संपर्क लेकर पहली बार जाने की तारीख और समय पक्का कर लीजिए।

पोप फ्रांसिस ने समलैंगिक पुरुषों के लिए अपमानजनक शब्द के उपयोग पर मांगी माफी
पोप फ्रांसिस माफी समलैंगिक पुरुष कैथोलिक चर्च

पोप फ्रांसिस ने समलैंगिक पुरुषों के लिए अपमानजनक शब्द के उपयोग पर मांगी माफी

पोप फ्रांसिस ने हाल ही में बिशपों के साथ एक बैठक के दौरान समलैंगिक पुरुषों के लिए एक अपमानजनक शब्द का उपयोग करने पर माफी मांगी है। यह बैठक वेटिकन में आयोजित की गई थी। फ्रांसिस ने समलैंगिक पुरुषों को कैथोलिक सेमिनारियों में प्रवेश देने के विचार का विरोध किया था। इस घटना के कारण LGBTQ कैथोलिक समूह निराश और दुखी है। चर्च की नकारात्मक शिक्षाओं के कारण लोग चर्च से दूर हो रहे हैं।

मई 29 2024