कभी सोचा है कि कुछ निवेशों को आप तुरंत पैसा निकालकर बेच नहीं पाते? यह नियम लॉक-इन अवधि कहलाता है। आसान शब्दों में, यह वो समय होता है जब निवेशक को अपनी राशि बेचने, निकासी करने या ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं होती।
हर निवेश का लॉक-इन अलग होता है। कुछ सामान्य उदाहरण:
हर प्रोडक्ट का प्रॉस्पेक्टस, ऑफर डॉक्यूमेंट या स्कीम डॉक्यूमेंट लॉक-इन नियम साफ बताता है।
लॉक-इन कई कारणों से होता है: नियामकीय सुरक्षा, टैक्स बेनिफिट की शर्तें, प्रमोटरों की प्रतिबद्धता या निवेश की स्थिरता। पर इसका मतलब ये भी है कि आप जल्दी नकदी नहीं पा पाएंगे। इसलिए प्लानिंग जरूरी है।
कई लोगों की गलती यह रहती है कि वे लॉक-इन वाले निवेश से आपातकालीन बचत नहीं बनाते। सही तरीका यह है कि आप अलग से 3–6 महीने की एक्सपेंस कवरेज कैश/लिक्विड फंड में रखें और लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए लॉक-इन उत्पाद लें।
टैक्स और लाभ पर भी असर पड़ता है। उदाहरण के लिए, ELSS में लॉक-इन पूरी होने पर भी कैपिटल गेन नियम लागू होंगे। ESOP में टैक्सेशन अलग तरह से होता है (एक्सरसाइज़ और सेल पर अलग-अलग असर)। इसलिए निवेश से पहले टैक्स नियम पढ़ें या सलाह लें।
अगर आपको अचानक पैसा चाहिए तो क्या करें? कुछ विकल्प होते हैं: वैकल्पिक लिक्विड फंड, ओवरड्राफ्ट, या आपातकालीन क्रेडिट लाइन। लॉक-इन वाले ही निवेश को तोड़ने पर पेनल्टी या नियमों के कारण नुकसान हो सकता है।
आम टिप्स:
लॉक-इन अवधि जरूरी है पर समझकर लिया जाए तो यह आपकी निवेश योजना का फायदेमंद हिस्सा बन सकती है। अगर किसी विशेष निवेश का लॉक-इन और टैक्स असर जानना हो तो उस प्रोडक्ट का दस्तावेज़ या फाइनेंसियल एडवाइज़र से सलाह लें।
Bajaj Housing Finance के 529 करोड़ शेयर लॉक-इन अवधि समाप्त होते ही बाजार में ट्रेड होने लगे, जिससे शेयरों में 4% उछाल आया. कंपनी की अप्रैल 2025 में घोषित तिमाही रिपोर्ट में 26% AUM ग्रोथ और 14,250 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड लोन डिस्बर्समेंट का भी असर शेयर पर पड़ा है.
अप्रैल 30 2025