पार्टी एकता सिर्फ चुनाव जीतने का जरिया नहीं है—यह भरोसा, संदेश की एकरूपता और जनता के साथ स्थायी संबंध बनाती है। क्या आपने देखा है कि जब अंदर ही अंदर लड़ाई चल रही हो तो जनता का भरोसा टूटता है? यही वजह है कि नेता और कार्यकर्ता रोज़ाना छोटे-छोटे कदम उठाते हैं ताकि फूट न पनपे।
सहयोग और अनुशासन दिखाई दे तो पार्टी एकजुट है। नेतृत्व द्वारा स्पष्ट निर्देश, स्थानीय कार्यकर्ताओं का सहयोग, और सार्वजनिक मंचों पर मिलकर बातें करना सकारात्मक संकेत हैं। दूसरी तरफ, खुला बाग़ीपन, लीक हुए पत्र, अलग-अलग सुरों में बयान और लगातार हार मिलना संकेत हैं कि एकता खतरे में है। उदाहरण के तौर पर, किसी बड़े फैसले जैसे जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे पर केंद्र के कदम के बाद (जैसे हालिया चर्चाओं में देखा गया) पार्टी के भीतर समर्थन नसीब होना या फिर विरोध दिखना दोनों ही अहम संकेत देते हैं।
पहला कदम है साफ और नियमित संवाद। नियमित बैठकों में छोटे मुद्दों को पहले सुलझाएं ताकि वे बड़े विवाद न बनें। दूसरे, उम्मीदवार और पदाधिकारियों का पारदर्शी चयन करें—जब फैसले खुले हों, तो असंतोष कम होता है।
तीसरा, संघर्ष निबटान का फॉर्मेट रखें: एक नोटिसेबल कमेटी जो विवादों को जल्दी देखे और समाधान दे। चौथा, स्थानीय संगठन को मजबूत करें—जब ग्राउंड लेवल पर लोग जुड़े होते हैं तो शीर्ष पर मतभेद कम असर डालते हैं।
संकट आते ही एकता दिखाने के लिए सामान्य पब्लिक लाइन और मीडिया टीम का समन्वय जरूरी है। उदाहरण के तौर पर, जब किसी आतंकी घटना या बड़ी घटना जैसी स्थिति आयी तो तेज़ और एकसुर वाले संदेश से पार्टी की छवि नियंत्रित रहती है—यही असर Pahalgam जैसे घटनाओं के समय देखा जा सकता है।
युवाओं और कार्यकर्ताओं को शामिल करना भी अहम है। ट्रेनिंग, रोल मॉडलिंग और छोटी जिम्मेदारियाँ देने से वे पार्टी के साथ जुड़ते हैं। साथ ही, उपलब्धि पर सार्वजनिक तौर पर पुरूस्कार दें—इससे काम करने वालों को मोटिवेशन मिलता है।
गठबंधन वाली राजनीति में झुकाव और समायोजन सीखना भी भाग है। हर सहयोग जरूरी नहीं कि बराबरी पर हो, पर कम-से-कम साझा एजेंडा पर सहमति चाहिए। व्यापार, विदेश नीति या राज्य स्तर के फैसलों में सामंजस्य बनाना वोटरों को प्रभावित करता है।
अंत में, नेतृत्व का व्यवहार तय करता है कि मतभेद किस तरह सुलझेंगे। शांत, सुनने वाला और निर्णय लेने वाला नेतृत्व मतभेदों को अवसर में बदल सकता है—जैसा कि किसी बड़े फैसले या लोकल रिफॉर्म्स में दिखता है। जब नेता एकजुट दिखते हैं, तो जनता और कार्यकर्ता दोनों को विश्वास मिलता है।
अगर आप पार्टी या संगठन में हैं, तो आज ही छोटी-छोटी चीज़ें बदलकर एकता पर काम शुरू कर सकते हैं—हर बैठक, हर संदेश और हर निर्णय मायने रखता है।
28 जुलाई 2024 को समाजवादी पार्टी की बैठक संपन्न हुई, जिसमें पार्टी नेता अखिलेश यादव ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अभियान तेज करने, घर-घर संपर्क करने और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान देने की बात कही। यादव ने सोशल मीडिया पर भी मजबूत उपस्थिति बनाए रखने पर जोर दिया।
जुलाई 28 2024