सटीक चिकित्सा (Precision Medicine) रोग के इलाज को मरीज के जीन, जीवनशैली और पर्यावरण के हिसाब से ढालने की तकनीक है। यह पारंपरिक 'एक-दवा-सबकेलिए' इलाज से अलग है।
पहले मरीज का जीनोम या डीएनए टेस्ट होता है, फिर डॉक्टर जोखिम और दवा की प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी लेते हैं। आधुनिक लैब टेस्ट, बायोमार्कर और कम्प्यूटर एल्गोरिदम मरीज़ के लिए सबसे प्रभावी इलाज चुनते हैं।
कैंसर, जीन संबंधी बीमारियाँ, कुछ हृदय रोग और दवा से एलर्जी के मामले में सटीक चिकित्सा सबसे ज्यादा मदद करती है। मसलन कुछ कैंसर में जीन परिवर्तन देखकर लक्षित दवा चुनी जाती है, जिससे असर बढ़ता और साइड इफेक्ट कम होता है।
भारत में यह तकनीक तेजी से बढ़ रही है, पर कीमत और विशेषज्ञता चुनौतियाँ हैं। बड़े शहरों में जीनोम टेस्टिंग और लक्षित उपचार उपलब्ध हैं, पर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में जानकारी और सुविधा कम है। सरकारी और निजी अस्पताल अब क्लीनिकल ट्रायल और स्थानीय जीन बैंक बना रहे हैं, जिससे कीमतें धीरे-धीरे घट सकती हैं।
अगर आप सटीक चिकित्सा पर विचार कर रहे हैं तो कुछ कदम मददगार होंगे। 1) अपने डॉक्टर से जीनोम या बायोमार्कर टेस्ट की सलाह लें। 2) प्रमाणित लैब चुनें और टेस्ट की रिपोर्ट को विशेषज्ञ जीन चिकित्सा टीम से चर्चा करें। 3) इलाज के फायदे, जोखिम और लागत को स्पष्ट रूप से समझें। 4) अगर संभव हो तो क्लीनिकल ट्रायल ऑप्शन देखें — नए इलाज पहले ट्रायल में सस्ते और असरदार मिल सकते हैं।
सटीक चिकित्सा सभी मामलों में काम नहीं करती; कुछ जीन बदलावों का इलाज उपलब्ध नहीं होता। डेटा सुरक्षा पर ध्यान दें—जीन रिपोर्ट में संवेदनशील जानकारी होती है, इसलिए टेस्ट देने से पहले प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ें।
भारत में बेसिक जीनोम या पैनल टेस्ट की कीमत कुछ हजार से लेकर लाखों तक हो सकती है, यह टेस्ट की जटिलता और प्रयोगशाला पर निर्भर करता है। इंश्योरेंस कवरेज फिलहाल सीमित है, पर कुछ योजनाएँ और कंपनियाँ आंशिक मदद देती हैं।
सटीक चिकित्सा के लिए उपयुक्त मरीज वे हैं जिनकी बीमारी जीन से जुड़ी हो या जिन्होंने सामान्य इलाज से लाभ न पाया हो। यदि आप शक में हों तो सेकंड ओपिनियन लें और जीन विशेषज्ञ से बात करें।
सटीक चिकित्सा नई उम्मीद है पर समझदारी से कदम उठाएँ — भरोसेमंद अस्पताल, प्रमाणित लैब और विशेषज्ञ सलाह आपके लिए सबसे जरूरी हैं। भारत समाचार पिन पर सटीक चिकित्सा से जुड़ी ताज़ा खबरें और गाइड मिलते रहते हैं; हमारे टैग पेज को फॉलो करें ताकि नए अपडेट न छूटें।
छोटी बातें जो मदद करें: टेस्ट करवाने से पहले लैब की सर्टिफिकेशन, रिपोर्ट का टर्नअराउंड टाइम और कंसल्टेशन फीस पूछ लें। रिपोर्ट मिलने पर डॉक्टर से इलाज के विकल्प, संभावित साइड इफेक्ट और विकल्पों की अपेक्षित सफलता दर पर खुलकर बात करें। यदि जीनोमिक डेटा को शेयर करना हो तो केवल विश्वसनीय रिसर्च या क्लीनिकल ट्रायल के लिए ही सहमति दें और लिखित अनुमति लें। समान बीमारी के कई मरीजों के केस पढ़ें ताकि आपको समझ आए कि कौन सा रास्ता ऑफलाइन या ऑनलाइन बेहतर।
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने अपने 'फेनोम इंडिया-सीएसआईआर हेल्थ कोहोर्ट नॉलेजबेस' (PI-CheCK) परियोजना के पहले चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय आबादी के लिए एक उन्नत पूर्वानुमान मॉडल विकसित करना है जो कार्डियो-मेटाबोलिक रोगों के जोखिम की सटीक भविष्यवाणी कर सके। इस पहल में 17 राज्यों और 24 शहरों से 10,000 से अधिक नमूने एकत्र किए गए हैं।
जून 3 2024