एक तेज बारिश या भूकंपीय झटका किसी भी ढाल को अचानक बहका सकता है। भारत के पहाड़ी और घाटी वाले हिस्सों में मॉनसून के दौरान भूस्खलन आम हैं। अगर आप जानते हैं कि क्या संकेत मिलते हैं और तुरंत क्या करना चाहिए, तो जान बच सकती है।
भूस्खलन के कारण सीधे और समझने में आसान होते हैं: भारी बरसात, तेज कटाव, कटे हुए ढलान, भूकंप और गलत निर्माण। कुछ साफ संकेत होते हैं जो भूस्खलन से पहले दिख जाते हैं:
1) जमीन में नई दरारें या दीवारों/फर्श का अचानक झुकना।
2) पेड़ों या खंभों का झुकना और फिसलने जैसा लगना।
3) ढलान से नीचे पानी का अनपेक्षित बहना या नए स्रोत का उभरना।
4) छोटी-छोटी मिट्टी या पत्थर की सरकनियाँ जो समय के साथ बढ़ती हैं।
यदि आप इनमें से कोई भी संकेत देखें तो संभल जाएँ — समय रहते सतर्क होने का मतलब बचाव की तैयारी कर लेना है।
पहले: घर पर एक आपातकिट रखें — पानी, टॉर्च, बैटरी, प्राथमिक चिकित्सा किट, दस्तावेज की प्रतिलिपियाँ और कुछ खाने की चीजें। अपने परिवार के साथ एक सुरक्षित स्थान और मिलन बिंदु तय कर लें। अपने मकान के निकट ढलान है तो परिवार में बच्चों और बुजुर्गों को खतरे और बचने के तरीके समझा दें।
निर्माण से जुड़ी सावधानियाँ: ढलान के तल पर घर बनाने से बचें। यदि ज़रूरत हो तो स्थानीय भू-वैज्ञानिक से स्लोप स्टेबिलिटी की जाँच करवाएँ। नाली और ड्रेनेज ठीक रखें — पानी का जमाव मिट्टी को कमजोर करता है।
दौरान (जब भूस्खलन हो रहा हो): तेज आवाज पर तुरंत ऊँची और सुरक्षित जगह की ओर जाएँ। यदि बाहर हैं, तो बहती वाली नदी या नाली के पास न रुकेँ। वाहन में हों और रास्ते में लैंडस्लाइड दिखे तो तुरंत वाहन रोककर ऊँची जगह पर सुरक्षा ढूँढें, वाहन में रहने से पहले जोखिम का आकलन करें। सिर और आंखों की सुरक्षा के लिए किसी मोटी चीज से ढक लें।
बाद में: फौरन स्थानीय आपातकालीन सेवाओं (112), पुलिस या आपदा प्रबंधन विभाग को सूचित करें। घायल लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाएँ पर बड़े खतरे वाले क्षेत्र में खुद न जाएँ। गैस या विद्युत आपूर्ति बंद करें अगर लीकेज का अंदेशा हो। बाद में पुन:स्थापना और घर की जाँच कराएँ, और मिट्टी के अस्थिर हिस्सों से दूरी बनाए रखें — सेकेंडरी स्लाइड का खतरा बना रहता है।
समुदाय स्तर पर क्या करें: गाँव या शहर में स्थानीय आपदा प्रबंधन से जुड़ें, बारिश के दौरान रेकॉर्डेड चेतावनियों को ध्यान से सुनें, और соседों के साथ मिलकर ड्रेनेज और पेड़ लगाने जैसे छोटे-छोटे कदम उठाएँ।
भूस्खलन अचानक आते हैं, पर सही तैयारी और तेज प्रतिक्रिया से नुकसान बहुत कम किया जा सकता है। मॉनसून में सतर्क रहें, संकेतों को नजरअंदाज़ न करें और सुरक्षित रहने की योजना पहले से बना लें।
केरल के वायनाड में 30 जुलाई को मुण्डकाई और चुरालमाला में दो बड़े भूस्खलनों ने भारी तबाही मचाई। मेजर जनरल वी.टी. मैथ्यू ने बताया कि 100 से अधिक शव मिल चुके हैं, लेकिन कुल मृतकों की संख्या कहीं अधिक है। इस आपदा में 167 लोगों की जान चली गई है। इन भूस्खलनों ने घरों, सड़कों और जल स्रोतों को नुक्सान पहुंचाया है जिससे बचाव कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
अगस्त 1 2024