इस्लामी पर्व सिर्फ धर्मिक आयोजन नहीं होते—ये समुदाय, दान और परंपरा से जुड़े वक्त होते हैं। चाहे ईद-उल-फित्र हो या ईद-उल-अधा, हर त्यौहार के पीछे लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी और तैयारी जुड़ी होती है। इस टैग पेज पर हम आपको ताज़ा खबरें, तिथियाँ और उपयोगी जानकारी देंगे ताकि आप समय पर अपडेट रहें।
रमज़ान: यह महीने भर का रोज़ा रखने का समय है। दिन के समय खाने-पीने से परहेज़ किया जाता है और रात में इफ्तार के जरिए रोज़ा खोला जाता है। रमज़ान के अंत पर ईद-उल-फित्र मनाई जाती है, जिसमें दान (जकात/फितरा) और सामूहिक नमाज़ अहम होती है।
ईद-उल-अधा: इसे क़र्बानी की ईद भी कहते हैं। यह हज के समय के साथ जुड़ा है और ज़रूरतमंदों के साथ मांस बांटना, क़ुर्बानी की रस्में और परिवार में मेलजोल इसका हिस्सा हैं।
मुहर्रम और आशूरा: मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है। शिया समुदाय में आशूरा का दिन खास है, जबकि सुन्नी समुदाय में भी यह दिन ऐतिहासिक घटनाओं की याद दिलाता है।
शब-ए-बरात और मिलाद-उन्नबी: शब-ए-बरात में दुआएँ और यादों का महत्व है। मिलाद-उन्नबी पैगंबर मुहम्मद ﷺ की सालगिरह के रूप में मनाई जाती है और इसमें नक्त, कव्वाली या जमघट होते हैं।
क्यों तिथियाँ बदलती रहती हैं? इस्लामी त्यौहार चंद्र कैलेंडर पर तय होते हैं, इसलिए हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर से तारीख बदलती है। मून-साइटिंग की वजह से देश के अलग हिस्सों में तारीख अलग हो सकती है।
अगर आप खबर लिख रहे हैं तो किसे शामिल करें? स्थानीय मस्जिद के इमाम, समाजसेवी और आयोजक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इफ्तार कार्यक्रम, ज़कात वितरण और क़ुर्बानी के सेक्शन की तस्वीरों में संवेदनशीलता रखें—भोजन वितरण और समुदायिक गतिविधियों को प्राथमिकता दें।
क्या पढ़ें या शेयर करें? आधिकारिक शुक्रवार की नमाज़, इफ्तार टाइम्स, और ज़कात नियम जैसे प्रैक्टिकल अपडेट पाठकों के काम आते हैं। त्योहारों के दौरान सुरक्षा निर्देश और भीड़ प्रबंधन की खबरें भी जरूरी होती हैं।
कैसे तैयारी करें (रोज़मर्रा के लिए आसान सुझाव): इफ्तार का टाइम पता रखें, ज़रूरी दान पहले तय कर लें, समारोहों में शामिल होने से पहले आयोजकों से कार्यक्रम की पुष्टि कर लें। अगर आप बाहर जा रहे हैं तो भीड़ और ट्रैफिक का प्लान रखें।
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शब-ए-बरात 2025 को 13-14 फरवरी की रात मनाई जाती है, इस्लामी पंचांग के शा'बान महीने की 15वीं रात को 'माफी की रात' के रूप में जाना जाता है। इस दिन रात्रि की प्रार्थनाएं, कब्रों की زيارت और दान-पुण्य होता है, जबकि कुछ लोग मिठाई वितरण और आतिशबाज़ी जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में भी भाग लेते हैं।
फ़रवरी 12 2025