यहां आपको जगन्नाथ से जुड़ी ताज़ा खबरें, रथयात्रा अपडेट और पुरी यात्रा के प्रैक्टिकल टिप्स मिलेंगे। अगर आप पुरी की रौनक देखना चाहते हैं या मंदिर दर्शन की सोच रहे हैं, तो पहले कुछ बेसिक बातें जान लें। इससे समय, पैसा और झंझट बचेगा।
जगन्नाथ भगवान की पूजा और रथयात्रा सदियों से चली आ रही है। मुख्य उत्सव आमतौर पर आशाढ़ के महीने में होता है, जब पुरी के मेड़ीया मैदान में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को विशाल रथों पर निकाला जाता है। यह देखने के लिए लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं।
रथयात्रा के दौरान कुछ खास रस्में होती हैं — चेरा-पहरा (सफाई का अनुष्ठान), महाप्रसाद और रथों को खींचना। पुरी के मंदिर में लकड़ी के बने देवता होते हैं और समय-समय पर उनकी नवकलेवर प्रक्रिया होती है। अगर आप सांस्कृतिक अनुभव चाहते हैं तो रथयात्रा देखना ज़रूर रखें।
परीक्षण-स्तर के टिप्स जो काम आएंगे: पुरी सबसे नज़दीक भुवनेश्वर एयरपोर्ट से लगभग 60 किमी है। ट्रेन भी अच्छा विकल्प है — पुरी जंक्शन पर कई सीधे ट्रेनें मिल जाती हैं। रथयात्रा और त्योहारों के दौरान होटल महीने पहले ही भर जाते हैं, इसलिए पहले से बुक करें।
मंदिर दर्शन के लिए पहचान-पत्र लेकर जाएं। मंदिर परिसर में सुरक्षा जांच और फोटोग्राफी पर पाबंदी हो सकती है, खासकर गर्भगृह के अंदर। सादे कपड़े पहनें और भीड़ में पर्स/कीमती चीज़ें सुरक्षित रखें। महाप्रसाद का स्वाद लेना अनुभव का हिस्सा है, पर स्वच्छता का ध्यान रखें।
मौसम के हिसाब से योजना बनाएं: मानसून में रथयात्रा होती है, लेकिन भारी भीड़ और गीला मौसम दोनों का असर रहता है। ठंड के महीनों (अक्टूबर-फरवरी) में मौसम अच्छा रहता है और यात्रा आरामदायक होती है। भीड़ से बचने के लिए सुबह के पहले दर्शन या शाम के समय के शेड्यूल पर ध्यान दें।
सुरक्षा के नुस्खे सरल हैं: पानी साथ रखें, बच्चों और बूढ़ों को हाथ में रखें, स्थानीय गाइड या अधिकारी की सलाह मानें, और भीड़ वाले हिस्सों में अलर्ट रहें। मेडिकल आपातकाल के नंबर और होटल का पता मोबाइल में सेव रखें।
शॉपिंग के लिए पटनचित्र (Pattachitra), सिल्क, समुद्री शैलों के छोटे हस्तशिल्प और स्थानीय स्नैक्स अच्छे विकल्प हैं। कीमतों पर हल्का मोलतोल करना सामान्य है।
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पुरी में होने वाली रथ यात्रा के लिए 200 से अधिक कारीगर तीन रथ बना रहे हैं, जिनमें 78 महाराणा सेवक शामिल हैं। ये चमत्कारी रथ बिना किसी कील या मशीन के, पूरी तरह पारंपरिक शिल्पकला से तैयार किए जा रहे हैं। 2025 की रथ यात्रा 27 जून को होगी, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेंगे।
जून 12 2025