क्या आप जानते हैं कि दिल की बीमारियाँ और मेटाबॉलिक समस्याएँ अक्सर साथ चलती हैं? कार्डियो‑मेटाबोलिक रोगों में हृदय रोग, मधुमेह (टाइप 2), उच्च रक्तचाप और असामान्य लिपिड प्रोफाइल एक ही पैटर्न में दिखते हैं। ये अकेले नहीं आते — मोटापा खासकर कमर के चारों ओर जमा चर्बी, सूजन और इंसुलिन प्रतिरोध इनके पीछे बड़ी वजह होते हैं।
अक्सर लोग शुरुआती लक्षण नजरअंदाज कर देते हैं: हल्की थकान, बार‑बार प्यास, रात में बार बार पेशाब या सांस फूलना। अगर आप इनमें से कोई भी महसूस कर रहे हैं तो वक्त रहते चेकअप कराना समझदारी है।
साधारण, जल्दी मिलने वाले टेस्ट जिनसे बहुत कुछ पता चल जाता है: फास्टिंग ब्लड शुगर, HbA1c (3 महीने की औसत शुगर), फुल फैट प्रोफ़ाइल (ट्राइग्लिसराइड, HDL, LDL), ब्लड प्रेशर और बीएमआई/कमर‑गirth माप। डॉक्टर जरूरत के अनुसार एल्ट्रा‑ऑडियो, ECG या एंजियोग्राफी भी सुझा सकते हैं। हर साल कम‑से‑कम बेसिक ब्लड टेस्ट करवा लें, खासकर 35+ उम्र या परिवार में इतिहास हो।
रोकथाम में छोटी‑छोटी आदतें बहुत फर्क डालती हैं। हर दिन 30 मिनट तेज़ वॉक या हल्की एक्सरसाइज करें — सप्ताह में 5 दिन का लक्ष्य रखें। खाने में प्रोसेस्ड चीजें, शकर, और ट्रांस‑फैट कम करें। सादा चावल‑रोटी की जगह साबुत अनाज, दाल‑सब्ज़ी और प्रोटीन बढ़ाएँ। वजन अगर कम होगा तो ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर दोनों सुधरते हैं; 5‑10% वजन घटाना काफी असर देता है।
नियमित नींद (7‑8 घंटे), धूम्रपान छोड़ना और शराब सीमित करना भी जरूरी है। पानी खूब पीएं और नमक कम करें — रोज़मर्रा की छोटी चीजें जैसे सूप या अचार का उपयोग नियंत्रित करें। घर पर BP मीटर और ग्लूकोमीटर रखने से ट्रेंड समझ आता है और दवाइयाँ समय पर शुरू या एडजस्ट की जा सकती हैं।
दवाइयों की ज़रूरत? कई बार लाइफस्टाइल ही काफी रहती है, लेकिन अगर डॉक्टर दवा बताते हैं तो उसे ठीक‑ठाक लें। स्टैटिन (कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल), एंटी‑हाइपरटेंसिव (BP के लिए), और मधुमेह की दवाइयाँ जैसे मेटफॉर्मिन इलाज के कमोन हिस्से हैं। दवाइयाँ लम्बे समय की होती हैं, इसलिए बिना सलाह बंद न करें।
अंत में, सुनने में साधारण लगे पर एक प्लान बनाना असरदार है: हर तीन‑छह महीने में चेकअप, रोज़ाना चलना/व्यायाम, और खाने‑पीने पर निगरानी। क्या आप अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहते हैं? छोटे‑छोटे बदलाव आज डालें, कल के बड़े जोखिम बचेंगे।
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने अपने 'फेनोम इंडिया-सीएसआईआर हेल्थ कोहोर्ट नॉलेजबेस' (PI-CheCK) परियोजना के पहले चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय आबादी के लिए एक उन्नत पूर्वानुमान मॉडल विकसित करना है जो कार्डियो-मेटाबोलिक रोगों के जोखिम की सटीक भविष्यवाणी कर सके। इस पहल में 17 राज्यों और 24 शहरों से 10,000 से अधिक नमूने एकत्र किए गए हैं।
जून 3 2024