कभी देखा होगा कि किसी कंपनी ने अचानक आपके खाते में अधिक शेयर दिखा दिए। वो अक्सर बोनस शेयर होते हैं। कंपनी अपने रिज़र्व्स या प्रॉफिट को कैपिटल में बदलकर मौजूदा शेयरधारकों को मुफ्त में नए शेयर देती है। इसका मकसद शेयरहोल्डर्स को रिवार्ड करना और कंपनी के शेयरों की परिमाणिक स्थिति बदलना होता है — नकद नहीं देते, बल्कि हिस्सेदारी बढ़ाते हैं।
सबसे पहले कंपनी बोर्ड बोनस की घोषणा करता है और रिकॉर्ड डेट बताता है। रिकॉर्ड डेट पर जिनके नाम डिमैट खाते में शेयर दर्ज होंगे, वही बोनस पाने के हकदार होते हैं। बोनस का अनुपात जैसे 1:1, 2:1 वगैरह होता है — 1:1 का मतलब आपके हर एक शेयर के बदले एक नया शेयर मिलेगा।
थ्योरी में कंपनी का मार्केट कैप बराबर रहता है, इसलिए शेयर का बाजार भाव बोनस के बाद घट जाता है। उदाहरण के लिए, अगर 1:1 बोनस मिलता है और पहले शेयर की कीमत ₹200 थी, तो नए कुल शेयर दोगुने होने की वजह से कीमत करीब आधी होकर ~₹100 हो सकती है — पर असल में कीमत मार्केट के मूड पर निर्भर रहती है।
फ्रैक्शनल शेयर्स (जब अनुपात से पूरा शेयर नहीं बनता) के लिए कंपनियां कैश दे सकती हैं या उन्हें समेकित कर देती हैं। बोनस शेयर मिलने पर आपका कुल मालिकाना प्रतिशत सामान्यतः वहीं रहता है, बस शेयरों की संख्या बढ़ जाती है।
1) कंपनी की घोषणाओं पर नज़र रखें: BSE/NSE नोटिस, कंपनी की वेबसाइट और आपके डिमैट ब्रोकर की नोटिफिकेशन देखें।
2) रिकॉर्ड डेट चेक करें: रिकॉर्ड डेट पर शेयर डिमैट में होने चाहिए। अगर आप शेयर रखकर बंद कर देते हैं तो बोनस मिलना बंद हो सकता है।
3) बांडलिंग और फ्रैक्शनल नियम समझें: अगर अनुपात से फ्रैक्शन आता है तो कंपनी कैश दे सकती है — नोटिस में विवरण होता है।
4) टैक्स और लागत आधार: आम तौर पर बोनस शेयर मिलने पर तुरंत टैक्स नहीं लगता, पर जब आप बेचते हैं तब कैपिटल गेन नियम लागू होते हैं। टैक्स का सही हिसाब करने के लिए अपने CA या टैक्स एडवाइज़र से सलाह लें।
बोनस शेयर स्टॉक स्प्लिट नहीं होते। स्प्लिट में केवल फेस वैल्यू बदलती है, जबकि बोनस में कंपनी का पेड-अप कैपिटल बढ़ता है। दोनों का प्रभाव शेयर प्राइस पर मिलता-जुलता दिख सकता है, पर कारण अलग होते हैं।
यदि आप सक्रिय निवेशक हैं तो बोनस घोषणाओं को कंपनी के वित्त, वृद्धि योजना और भविष्य की नीति के संदर्भ में देखें। बोनस तभी ज्यादा मायने रखता है जब कंपनी के फंडामेंटल मजबूत हों।
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और हाँ, किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपना रिसर्च करें और ज़रूरत हो तो प्रोफेशनल सलाह लें।
BSE के शेयर 23 मई 2025 को 7% तक चढ़े, जबकि कंपनी ने 2:1 बोनस शेयर दिए। शेयर के तीन हिस्सों में बंटने और मार्केट उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों ने भरोसा दिखाया। बॉर्ड की मंजूरी के बाद नई लिस्टिंग 27 मई को होगी। एक्स-बोनस के बाद भी ट्रेडिंग वॉल्यूम और निवेशक रुचि बनी रही।
जुलाई 9 2025